नेशनल डेस्क, श्रेयांश पराशर l
तिरुवनंतपुरम। रक्षा मंत्रालय ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) से जुड़ी कथित साइबर सुरक्षा घटना पर सामने आई मीडिया रिपोर्टों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि अब तक किसी सक्रिय साइबर हमले, नेटवर्क में अनधिकृत घुसपैठ या संवेदनशील डेटा की लगातार चोरी के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। मंत्रालय ने कहा कि पूरे मामले की संबंधित एजेंसियों द्वारा विस्तृत जांच कराई गई है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मीडिया में प्रसारित कई दावे भ्रामक पाए गए हैं।
मंत्रालय के अनुसार, जिन दस्तावेजों और आंकड़ों के लीक होने का दावा किया जा रहा है, उनमें अधिकांश गोपनीय श्रेणी के नहीं हैं। कुछ दस्तावेज वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई एक पुरानी डेटा सेंधमारी से जुड़े बताए गए हैं, जिनका वर्तमान रक्षा तंत्र या चल रही परियोजनाओं से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
रक्षा मंत्रालय ने यह भी आरोप लगाया कि साइबर हमले से जुड़े कुछ तत्वों ने पुराने दस्तावेजों में हेरफेर कर उन्हें संवेदनशील और वर्तमान जानकारी के रूप में पेश करने की कोशिश की है। मंत्रालय का कहना है कि कथित रूप से लीक किए गए दस्तावेज पहले ही संशोधित या अप्रासंगिक हो चुके हैं और वे मौजूदा व्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ साइबर अपराधी इन दस्तावेजों को विभिन्न माध्यमों से बेचने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग स्रोतों पर उपलब्ध कराया जा रहा डेटा एक जैसा है और उसका वर्तमान रक्षा गतिविधियों या मंत्रालय के संचालन से कोई संबंध नहीं है।
मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह के दावों का उद्देश्य वित्तीय लाभ कमाना, भ्रम और डर का माहौल बनाना तथा लोगों को गुमराह करना हो सकता है। उन्होंने नागरिकों और मीडिया से अपील की कि अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी जानकारी को ही प्रमाणिक मानें। रक्षा मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि देश की साइबर सुरक्षा व्यवस्था सतर्क है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए आवश्यक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं।







