नेशनल डेस्क, मुस्कान सिंह |
नई दिल्ली: कांग्रेस ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चंदा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को गंभीर बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लीपापोती नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि ट्रस्ट पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं तो मौजूदा ट्रस्ट को तत्काल भंग कर नए ट्रस्ट का गठन किया जाना चाहिए, ताकि पूरे मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित हो सके।
नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि राम मंदिर से जुड़े जमीन अधिग्रहण से लेकर चंदा संग्रह और कथित वित्तीय अनियमितताओं तक कई गंभीर आरोप समय-समय पर सामने आए हैं। उनका कहना था कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण का श्रेय लेने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस विवाद पर मौन हैं। उन्होंने कहा कि जब चंदा चोरी और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप सामने आए, तब सरकार की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई। कांग्रेस का आरोप है कि मामले में जवाबदेही तय किए बिना इसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान जनता की आस्था का प्रतीक है और उसकी सुरक्षा तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करना ट्रस्ट और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने दावा किया कि यह मुद्दा अब देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है और लोग पूरे मामले की सच्चाई जानना चाहते हैं। गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट के गठन और उसके संचालन में पारदर्शिता का अभाव रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कथित अनियमितताओं की जानकारी पहले से संबंधित लोगों को थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कांग्रेस ने मांग की कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक संबंधित ट्रस्ट को भंग कर नए ट्रस्ट का गठन किया जाए।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित ट्रस्ट अथवा सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले में जांच अथवा आगे की कार्रवाई संबंधित एजेंसियों और सक्षम प्राधिकार के निर्णय पर निर्भर करेगी।






