स्टेट डेस्क , रानी कुमारी
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की एकीकृत जनजातीय विकास परियोजना (आईटीडीपी) भैंसदेही को जनजातीय क्षेत्रों में उत्कृष्ट विकास कार्यों और समग्र विकास मॉडल के सफल क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित नेशनल कॉन्क्लेव-2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आईटीडीपी भैंसदेही को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। इस अवसर पर परियोजना को पांच लाख रुपये की पुरस्कार राशि भी प्रदान की गई।
समारोह में राष्ट्रपति ने देशभर की जनजातीय विकास परियोजनाओं के कार्यों की समीक्षा करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली इकाइयों को सम्मानित किया। आईटीडीपी भैंसदेही की ओर से सहायक आयुक्त एवं प्रभारी परियोजना प्रशासक विवेक कुमार पाण्डेय ने यह सम्मान ग्रहण किया। यह सम्मान जनजातीय क्षेत्रों में विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, सुशासन और सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए प्रदान किया गया।
इस उपलब्धि पर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री दुर्गादास उइके, जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा बैतूल जिला प्रशासन ने परियोजना दल को बधाई दी। अधिकारियों ने कहा कि यह सम्मान न केवल भैंसदेही परियोजना की सफलता का प्रमाण है, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों के सतत एवं समावेशी विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति भी है।
आईटीडीपी भैंसदेही ने भैंसदेही, भीमपुर और आठनेर विकासखंडों के 231 जनजातीय बहुल गांवों में अभिसरण आधारित विकास मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू किया है। परियोजना के तहत आधारभूत संरचना विकास, आजीविका संवर्धन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और सुशासन से जुड़े कार्यक्रमों को एकीकृत रूप से संचालित किया गया। इससे जनजातीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ सरकारी योजनाओं की पहुंच भी बढ़ी है।
परियोजना के अंतर्गत धरती आबा अभियान, आदि कर्मयोगी अभियान तथा विभिन्न जनजातीय कल्याण कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। इन पहलों के माध्यम से जनजातीय परिवारों को रोजगार, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने का कार्य किया गया, जिससे क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं विकसित हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईटीडीपी भैंसदेही का यह मॉडल देश के अन्य जनजातीय क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। राष्ट्रीय सम्मान मिलने से परियोजना के कार्यों को नई पहचान मिली है और भविष्य में जनजातीय विकास के क्षेत्र में और अधिक नवाचार एवं प्रभावी कार्यों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।







