विदेश डेस्क, ऋषि राज
मॉस्को: रूस ने यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका की ओर से दिए गए प्रस्तावों को पूरी तरह खारिज करने से इनकार किया है। रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रियाबकोव ने कहा कि अलास्का में प्रस्तावित शिखर वार्ता से पहले दोनों देशों के बीच जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, रूस अब भी उन पर कायम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत के रास्ते बंद नहीं हुए हैं और यदि सभी पक्ष व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हैं तो समाधान की दिशा में प्रगति संभव है।
रियाबकोव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि रूस ने अमेरिका द्वारा प्रस्तुत सभी प्रस्तावों को अस्वीकार नहीं किया है। उनके अनुसार जिन विषयों पर पहले से सहमति बनी थी, उन पर आगे भी चर्चा जारी रहेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन संकट को लेकर अमेरिका की वर्तमान नीति अभी भी कई मामलों में रूस की अपेक्षाओं से अलग है। इसलिए स्थायी समाधान के लिए दोनों देशों को अपने-अपने रुख में व्यवहारिक संतुलन लाना होगा।
रूस का कहना है कि यूक्रेन संघर्ष केवल सैन्य नहीं बल्कि राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। इसलिए किसी भी शांति समझौते में रूस की सुरक्षा चिंताओं को शामिल किया जाना आवश्यक होगा। रियाबकोव ने दोहराया कि रूस युद्ध समाप्त करने के लिए वार्ता का विरोध नहीं करता, लेकिन किसी भी समझौते में उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब नाटो शिखर सम्मेलन और अमेरिका-रूस के बीच संभावित उच्चस्तरीय बातचीत की तैयारियां चल रही हैं। कई पश्चिमी देशों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कोई नया कूटनीतिक रास्ता निकल सकता है। यदि वार्ता आगे बढ़ती है तो इससे युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में तनाव कम होने की संभावना बन सकती है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यूक्रेन युद्ध का असर केवल यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा बाजार, खाद्यान्न आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हुई है। ऐसे में किसी भी सकारात्मक कूटनीतिक पहल का स्वागत किया जाएगा। फिलहाल दोनों पक्षो के बीच मतभेद बने हुए हैं, लेकिन रूस का यह संकेत कि अमेरिकी प्रस्तावों को पूरी तरह नकारा नहीं गया है, भविष्य की वार्ताओं के लिए उम्मीद की एक नई किरण माना जा रहा है।







