स्टेट डेस्क, एन के सिंह।
3.25 लाख सदस्यों का यह कारवां अब 22 फरवरी को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 'बिहार डेवलपमेंट समिट 2026' के जरिए अपनी ताकत और धमक दिखाएगा।
पटना: बिहार की मिट्टी में ज्ञान की जो लौ सदियों पहले नालंदा और विक्रमशिला के रूप में प्रज्वलित हुई थी, वह एक बार फिर आधुनिक युग में 'साहित्यिक पुनर्जागरण' बनकर धधक उठी है। पटना के ऐतिहासिक विद्यापति भवन में आयोजित 'प्रथम लिटरेचर फेस्टिवल 2026' ने न केवल सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि जब बौद्धिक संपदा और युवा संकल्प एक साथ मिलते हैं, तो इतिहास रचा जाता है। 'लेट्स इंस्पायर बिहार' अभियान के तहत हुए इस महाकुंभ ने सात समंदर पार तक बिहार की मेधा का परचम लहरा दिया है।
साहित्यिक गौरव और विरासत का संगम
इस महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसका उद्देश्य रहा—बिहार की उस लुप्त होती साहित्यिक विरासत को पुनर्जीवित करना, जिसने कभी विश्व को दर्शन और ज्ञान का मार्ग दिखाया था। कार्यक्रम के प्रणेता और वरिष्ठ आईपीएस विकास वैभव ने अपनी ओजस्वी वाणी से युवाओं में नए प्राण फूंके। उन्होंने नालंदा और विक्रमशिला के वैभवशाली अतीत का स्मरण कराते हुए आह्वान किया कि बिहार की युवाशक्ति को जाति, संप्रदाय और संकुचित विचारधारात्मक मतभेदों की बेड़ियों को तोड़कर राष्ट्रहित के लिए आगे आना होगा। उनका सपना है कि बिहार का हर प्रखंड और पंचायत साहित्यानुरागियों और प्रबुद्धजनों का केंद्र बने, ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखी जा सके।
दिग्गजों की उपस्थिति से गौरवान्वित हुआ मंच
महोत्सव की गरिमा को बढ़ाने के लिए बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री माननीय अरुण शंकर प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि साहित्य ही वह सेतु है जो राष्ट्र के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में चर्चित लेखक और वरिष्ठ आईपीएस अमित लोढ़ा, कुलपति प्रमेंद्र वाजपेयी और 'हंस' पत्रिका की एमडी रचना यादव जैसे मनीषियों ने अपनी उपस्थिति से सत्रों को विचारोत्तेजक बनाया। इस समागम में केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि अबू धाबी से प्रियंका झा और आयरलैंड से रविनंदन प्रताप सिंह जैसे अप्रवासी बिहारियों ने भी शिरकत की, जो यह दर्शाता है कि अपनी जड़ों से जुड़ने की तड़प सीमाओं को नहीं मानती।
काव्य और कला की गूँज
विद्यापति भवन का कोना-कोना कवियत्री तिश्या श्री, शेफालिका झा और कवि समीर परिमल की कालजयी रचनाओं से गुंजायमान रहा। महोत्सव ने महाकवि विद्यापति, राष्ट्रकवि दिनकर, फणीश्वर नाथ रेणु और बाबा नागार्जुन जैसी विभूतियों को याद करते हुए उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन की शुरुआत थी, जिसका लक्ष्य 'शिक्षित और विकसित बिहार' का निर्माण करना है।
अगला लक्ष्य: दिल्ली के तालकटोरा में दिखेगी 'बिहार की धमक'
पटना में मिली इस अभूतपूर्व सफलता ने अब एक बड़े कारवां का रूप ले लिया है। 3.25 लाख सदस्यों के मजबूत आधार के साथ 'लेट्स इंस्पायर बिहार' अब राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच करने को तैयार है। आगामी 22 फरवरी, 2026 को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 'बिहार डेवलपमेंट समिट 2026' का आयोजन किया जाएगा। यह समिट दिल्ली की धरती पर बिहार की शक्ति, संस्कृति और विकास के संकल्प का ऐसा प्रदर्शन होगा, जिसे दुनिया 'बिहार की धमक' के रूप में देखेगी।
"यह अभियान अब एक जन-आंदोलन बन चुका है। पटना की सफलता तो बस शुरुआत है, दिल्ली में बिहार की बौद्धिक और सामाजिक एकता का असली सामर्थ्य दिखाई देगा।"







