विदेश डेस्क, ऋषि राज |
बेरूत: लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनका देश क्षेत्रीय संघर्षों में एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान और उसके समर्थित संगठनों की गतिविधियों के कारण लेबनान लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, सुरक्षा चुनौतियों और आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और विभिन्न देशों के बीच कूटनीतिक टकराव तेज हो गया है।
राष्ट्रपति भवन में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में जोसेफ औन ने कहा कि लेबनान के नागरिक वर्षों से संघर्ष और असुरक्षा का बोझ झेल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लेबनान की राष्ट्रीय प्राथमिकताएं किसी अन्य देश के रणनीतिक हितों से मेल नहीं खातीं और देश को बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाना चाहिए। उन्होंने ईरान से लेबनान के आंतरिक मामलों में दखल बंद करने की मांग भी की।
औन ने कहा कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच चल रहे संघर्ष का सबसे अधिक प्रभाव आम लेबनानी नागरिकों पर पड़ रहा है। हजारों परिवार विस्थापन, आर्थिक कठिनाइयों और सुरक्षा संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लेबनान को शांति, स्थिरता और आर्थिक पुनर्निर्माण की आवश्यकता है, न कि लगातार संघर्षों की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति का यह बयान क्षेत्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है। इससे लेबनान और ईरान के संबंधों में नई बहस शुरू हो सकती है। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जता रहा है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें लेबनान, ईरान और इजरायल से जुड़ी आगामी कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।







