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वीरगंज की बेटी का आसमान में डंका, आयुषा कापरी बनीं सबसे कम उम्र की पायलट

लोकल डेस्क, एन के सिंह।

अमेरिका में ट्रेनिंग लेकर रचा इतिहास। नेपाल ऑयल निगम में बाउज़र ऑपरेटर के पद पर कार्यरत पिता के सीमित संसाधनों के बावजूद हौसलों के दम पर छू लिया आसमान।

पूर्वी चंपारण: नेपाल के विमानन क्षेत्र में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। वीरगंज की आयुषा कापरी ने महज 21 वर्ष की आयु में पायलट बनकर न केवल अपने परिवार का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पर्सा जिले की सबसे कम उम्र की पायलट बनने का गौरव भी हासिल किया है। पुरुष प्रधान माने जाने वाले इस चुनौतीपूर्ण पेशे में आयुषा की यह लंबी छलांग नेपाल की हजारों बेटियों के सपनों को नई उड़ान देने वाली है।

बचपन का सपना, अमेरिका में हकीकत

29 जून 2004 को वीरगंज में जन्मी आयुषा की आंखों में बचपन से ही बादलों के पार जाने का सपना था। अपने इसी जुनून को पूरा करने के लिए उन्होंने सात समंदर पार संयुक्त राज्य अमेरिका का रुख किया। वहां के आधुनिक तकनीकी माहौल और कड़े अनुशासन वाले प्रशिक्षण संस्थानों में आयुषा ने खुद को साबित किया। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों और कठिन प्रतिस्पर्धा के बीच उन्होंने अपना पायलट कोर्स सफलतापूर्वक पूरा किया, जो उनकी अटूट मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है।

साधारण पिता और असाधारण हौसला

आयुषा की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि वे एक बेहद साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आती हैं। उनके पिता बिरेन्द्र कापरी नेपाल ऑयल निगम में बाउज़र ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद पिता ने अपनी बेटी के पंखों को कभी झुकने नहीं दिया। परिवार के निरंतर सहयोग और भरोसे ने आयुषा को हर मुश्किल मोड़ पर हिम्मत दी। आयुषा अपनी इस यात्रा में अपने मामा उमेश धिमाल के मार्गदर्शन को भी अहम मानती हैं, जो सिनामंगल स्थित एविएशन फ्यूल डिपो में कार्यरत हैं। उनके व्यावहारिक सुझावों ने आयुषा को विमानन क्षेत्र की बारिकियों को समझने में काफी मदद की।

नेपाल के चुनौतीपूर्ण भूगोल में नई उम्मीद

नेपाल जैसे भौगोलिक रूप से कठिन देश के लिए हवाई सेवा जीवनरेखा के समान है। यहाँ के पहाड़ों और दुर्गम इलाकों में विमान उड़ाने के लिए कुशल और मानसिक रूप से मजबूत पायलटों की भारी आवश्यकता रहती है। ऐसे में आयुषा जैसी युवा और अनुशासित पायलट का सामने आना नेपाली विमानन क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। वे न केवल एक पेशेवर पायलट बनी हैं, बल्कि उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर आत्मविश्वास हो, तो आसमान की ऊंचाइयां भी छोटी पड़ जाती हैं।

हजारों युवतियों के लिए बनीं प्रेरणा

आयुषा कापरी की सफलता की गूंज आज पूरे पर्सा जिले में है। उन्होंने केवल विमान ही नहीं उड़ाया है, बल्कि समाज की उन रूढ़ियों को भी पीछे छोड़ दिया है जो महिलाओं के लिए सीमाओं का निर्धारण करती हैं। उनकी यह जीवन यात्रा इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, पारिवारिक सहयोग और खुद पर यकीन हो, तो किसी भी असंभव लक्ष्य को मुमकिन बनाया जा सकता है। वीरगंज की यह 'उड़न परी' अब नई पीढ़ी की लड़कियों के लिए रोल मॉडल बन चुकी है।