नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
नई दिल्ली: देश में परीक्षा से जुड़ी हालिया अनियमितताओं और कथित पेपर लीक के मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। प्रख्यात जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए केंद्र सरकार को एक अल्टीमेटम दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इन विफलताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वे 27 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
यह पूरा घटनाक्रम 'कॉकरोच जनता पार्टी' द्वारा आयोजित प्रदर्शनों का हिस्सा है, जो देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। सोनम वांगचुक ने इस प्रदर्शन में शामिल होकर युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का समर्थन किया है। वांगचुक ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर युवाओं की सराहना की है, जो अहिंसक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने स्वयं को इस "कॉकरोच आंदोलन" का हिस्सा बताते हुए कहा है कि यह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक अपील है।
प्रदर्शनकारियों और वांगचुक की मुख्य मांग यह है कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वह युवाओं के भविष्य को प्राथमिकता दे और यदि व्यवस्था विफल होती है, तो संबंधित मंत्रियों को जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन में भारी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए हैं, जो दिल्ली पुलिस की पाबंदियों के बावजूद अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। वांगचुक का यह कदम देश के शिक्षा जगत में सुधार के लिए चल रहे संघर्ष को एक नई गति देता है। उन्होंने कहा है कि एक स्वाभिमानी लोकतंत्र में ऐसी विफलताओं पर मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए, और यदि उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तो वे भूख हड़ताल के माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुंचाएंगे। यह आंदोलन अब देश भर के छात्रों और युवाओं के बीच एक महत्वपूर्ण विमर्श का विषय बन गया है।






