स्टेट डेस्क, आर्या कुमारी।
सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी जिले से मानवता को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक रेड लाइट एरिया से प्रशासनिक टीम द्वारा छुड़ाई गई नेपाल की नाबालिग लड़की को एक शातिर महिला ने 'फर्जी मां' बनकर सिवान के सरकारी आश्रय गृह (शेल्टर होम) से दोबारा अपने चंगुल में ले लिया। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा गठित विशेष जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद पुलिस और प्रशासन एक्शन मोड में आ गए हैं। इस पूरे रैकेट में शामिल अन्य दोषियों को चिह्नित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के अध्यक्ष और सदस्यों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कमेटी की जांच में इन अधिकारियों की लापरवाही सामने आने के बाद जैसे ही इनके विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की गई, प्रशासनिक महकमे में गहमागहमी बढ़ गई है। खासकर मुख्यालय डुमरा स्थित 'वन स्टॉप सेंटर' पर लगातार बैठकों का दौर जारी रहा। गौरतलब है कि पिछले साल रेड लाइट एरिया से रेस्क्यू किए जाने के बाद पीड़िता को सबसे पहले इसी वन स्टॉप सेंटर में सुरक्षित रखा गया था, जहां से कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे सिवान के आश्रय गृह भेजा गया था।
घटनाक्रम की शुरुआत 16 दिसंबर 2025 को हुई थी, जब पुलिस की एक विशेष टीम ने शहर के बदनाम रेड लाइट एरिया में गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की थी। इस दौरान वहां से नेपाल की एक नाबालिग लड़की को सकुशल रेस्क्यू किया गया था। प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा के लिहाज से नाबालिग को सिवान स्थित आश्रय गृह भेज दिया गया। जैसे ही इसकी भनक रेड लाइट एरिया में देह व्यापार के धंधे को संचालित करने वाली मुख्य आरोपी नफीसा खातून को लगी, उसने लड़की को दोबारा अपने दलदल में खींचने की खौफनाक साजिश रची।
नफीसा खातून ने खुद को नाबालिग की असली मां बताते हुए सिवान आश्रय गृह से संपर्क किया। उसने वहां के प्रबंधन के सामने कई फर्जी और जाली कागजात पेश किए। आश्रय गृह प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण कागजातों की सही ढंग से जांच नहीं की गई और नफीसा के झूठे दावों को सच मानकर नाबालिग को उसके हवाले कर दिया गया। आश्रय गृह से छूटते ही आरोपी महिला उसे वापस सीतामढ़ी के देह व्यापार बाजार में ले आई, जहां पीड़िता पर दोबारा जुल्मों का सिलसिला शुरू हो गया। इस बीच जब नेपाल में रह रहे लड़की के वास्तविक पिता को अपनी बेटी के इस हाल की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत सीतामढ़ी पहुंचकर पुलिस अधीक्षक (एसपी) से न्याय की गुहार लगाई।
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है कि जिस नफीसा खातून को आश्रय गृह ने इतनी आसानी से बच्ची सौंप दी, वह पहले से ही एक कुख्यात अपराधी है। वर्ष 2023 में भी पुलिस ने देह व्यापार के एक बड़े मामले में नफीसा खातून समेत सात लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। पुलिस को दिए गए अपने पिछले बयानों में पीड़ित नाबालिग ने स्पष्ट रूप से बताया था कि उससे जबरन देह व्यापार कराया जाता था। ग्राहकों से मिलने वाली मोटी रकम को नफीसा खातून और उसका पति राजा मुजूर खलीफा आपस में बांट लेते थे। ऐसे गंभीर आपराधिक इतिहास वाली महिला के झांसे में बाल कल्याण समिति और आश्रय गृह प्रबंधन कैसे आ गया, यह पूरी व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
इस पूरे मामले के सिलसिलेवार घटनाक्रम पर नजर डालें तो 16 दिसंबर 2025 को रेड लाइट एरिया में हुई छापेमारी के दौरान इस नाबालिग को पहली बार मुक्त कराया गया था, जिसके बाद दिसंबर 2025 में ही उसे सिवान आश्रय गृह भेजा गया। इसके बाद 1 जनवरी 2026 को आरोपी महिला नकली मां बनकर उसे दोबारा सीतामढ़ी के दलदल में ले आई। लंबी प्रताड़ना के बाद, 14 अप्रैल 2026 को वास्तविक पिता के आवेदन पर एसपी के निर्देश पर पुलिस ने दोबारा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर लड़की को मुक्त कराया और पिता के सुपुर्द किया। अंततः 13 जुलाई को जांच टीम की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने लापरवाह अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की आधिकारिक अनुशंसा कर दी है।







