बिजनेस डेस्क , रानी कुमारी
केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर बड़ा फैसला लेते हुए आयात शुल्क को बढ़ाकर कुल 15 प्रतिशत कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम देश में बढ़ते विदेशी मुद्रा खर्च को नियंत्रित करने और गैर-जरूरी आयात को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पहले सोने और चांदी पर छह प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 10 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त पांच प्रतिशत कृषि उपकर भी लागू किया गया है। इस तरह कुल प्रभावी शुल्क 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है।ड्यूटी बढ़ने से आयातित सोना महंगा होगा, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार में 10 ग्राम सोने और 1 किलो चांदी की कीमतों पर पड़ेगा।
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारत का आयात बिल लगातार बढ़ रहा है। कच्चे तेल और गैस के आयात पर अधिक विदेशी मुद्रा खर्च होने से सरकार अन्य गैर-जरूरी आयातों को नियंत्रित करने की रणनीति अपना रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। इसके साथ ही उन्होंने अनावश्यक विदेशी यात्राओं में कमी लाने और ईंधन की बचत करने का भी आग्रह किया था। सरकार के कई मंत्री भी समय-समय पर इस अपील को दोहरा चुके हैं।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, आयात शुल्क बढ़ाने से सरकार को राजस्व में बढ़ोतरी के साथ-साथ चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ज्वेलरी उद्योग और व्यापारियों पर इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि कीमतों में बढ़ोतरी से ग्राहकों की खरीद क्षमता प्रभावित हो सकती है।
स्मगलिंग का खतरा: विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शुल्क के कारण सोने की तस्करी में वृद्धि हो सकती है।







