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हार्दिक पांड्या के खिलाफ जीत के जश्न में तिरंगे के अपमान का लगा आरोप

स्पोर्ट्स डेस्क, श्रेया पाण्डेय 

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस बार मामला किसी खेल या निजी जीवन से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक तिरंगे के कथित अपमान से जुड़ा है। हाल ही में अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में संपन्न हुए ICC पुरुष T20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद, टीम के खिलाड़ियों ने मैदान पर जमकर जश्न मनाया। इसी जश्न के दौरान के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसके आधार पर हार्दिक पांड्या के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

पुणे के एक वकील, वाजेद खान बिडकर ने बेंगलुरु के शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि हार्दिक पांड्या ने जीत के उत्साह में राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा का उल्लंघन किया है। शिकायत के अनुसार, जब भारतीय टीम मैदान पर अपनी खिताबी जीत का जश्न मना रही थी, तब हार्दिक पांड्या ने तिरंगे को अपने कंधों पर लपेट रखा था। वायरल वीडियो में उन्हें तिरंगा ओढ़े हुए अपनी गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा के साथ मंच पर लेटे हुए और नाचते हुए देखा गया।

वकील वाजेद खान का कहना है कि राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) की धारा 2 के तहत राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि पांड्या जीत के नशे में इतने चूर थे कि उन्होंने तिरंगा पहने हुए ही आपत्तिजनक तरीके से मंच पर लेटने का व्यवहार किया, जो तिरंगे की मर्यादा के खिलाफ है। शिकायतकर्ता के अनुसार, तिरंगे का उपयोग किसी परिधान की तरह करना या उसे ओढ़कर जमीन या मंच पर लेटना अपमान की श्रेणी में आता है।

हालांकि, पुलिस ने फिलहाल इस शिकायत को स्वीकार कर लिया है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज होने या किसी कठोर कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अक्सर व्यक्ति की 'मंशा' (Intent) देखी जाती है। चूंकि पांड्या देश की बड़ी जीत का जश्न मना रहे थे, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस और अदालत इस पर क्या रुख अपनाती है। सोशल मीडिया पर भी प्रशंसक दो गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं; जहां कुछ लोग इसे महज एक भावनात्मक क्षण मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे राष्ट्रीय प्रतीक के प्रति लापरवाही बता रहे हैं।