Ad Image
Ad Image
ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी || अहमदाबाद - मुंबई हाईवे पर दर्दनाक सड़क हादसा, 12 की मौत 25 से ज्यादा घायल || राष्ट्रपति ट्रंप का दावा: समझौते के लिए ईरान बेताब, ईरान का इनकार || Delhi - NCR में सीएनजी फिर महंगा, तीन दिन में तीसरी बार कीमत वृद्धि || PM मोदी का नीदरलैंड दौरा, द्विपक्षीय रिश्ते की बेहतरी पर बल दिया || लन्दन: ब्रिटिश PM कीर स्टारमर दे सकते है इस्तीफा, स्थानीय चुनावों में पार्टी की हार का असर || युद्ध समाप्ति पर ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत हुई: राष्ट्रपति ट्रंप

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

हिसार का 'कैंसर गांव': चिड़ौद में 10 साल में 50 मौतें, पानी बना जहर

नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।

हिसार। हरियाणा के हिसार जिले के चिड़ौद गांव में कैंसर की भयावह स्थिति ने लोगों की जिंदगी पर साया डाल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले दस सालों में करीब 50 लोग कैंसर से दम तोड़ चुके हैं, जबकि अभी भी 15 मरीज इलाज की जंग लड़ रहे हैं। मुख्य वजह बताया जा रहा है भूमिगत खारा पानी, जिसका टीडीएस स्तर 1500 से 2000 तक पहुंच गया है।

यह गांव करीब चार हजार की आबादी वाला है, जहां हर छठे महीने में औसतन एक कैंसर मरीज की मौत हो रही है। ग्रामीण सतबीर, मांगेराम, भूप सिंह, संजय और रमेश जैसे कई लोगों ने बताया कि बीमारी तेजी से फैल रही है। अधिकतर मामलों में गले और फेफड़ों का कैंसर देखा गया है। गांव में ऐसा कोई मोहल्ला नहीं बचा जहां कोई न कोई कैंसर पीड़ित न हो।

सुभाष नामक ग्रामीण ने अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2025 में उनके भाई पटेल सिंह की कैंसर से मौत हो गई। "गांव में कैंसर का ऐसा कोई कोना नहीं जहां मरीज न हो। अभी तक 50 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। सब पानी को जिम्मेदार ठहराते हैं," सुभाष ने बताया।

ग्रामीणों का कहना है कि पीने का पानी मुख्य रूप से ट्यूबवेल से आता है, जो खारा और पीने लायक नहीं। महीने में सिर्फ 15 दिन नहर का पानी जलघर में छोड़ा जाता है, जिससे कुछ दिनों के लिए सप्लाई मिलती है। उसके बाद ट्यूबवेल का खारा पानी ही चलता है। गांव में एक-दो नलकूप हैं, लेकिन वे पर्याप्त नहीं। जांच में भी पानी अयोग्य पाया गया है।

ग्रामीण कई बार जिला उपायुक्त और अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका डर है कि अगर यही स्थिति रही तो जल्द ही हर घर में एक कैंसर मरीज होगा। कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. लवनिश गोयल (हिसार) का मानना है कि हवा में प्रदूषण, पानी में दूषण और फसलों पर कीटनाशक-यूरिया का अत्यधिक छिड़काव कैंसर को बढ़ावा दे रहा है। रासायनिक तत्व भूमिगत पानी में घुलकर लोगों तक पहुंच रहे हैं। हालांकि गांव के सरपंच प्रतिनिधि मोलू राम का कहना है कि गांव में स्वच्छ पेयजल की सप्लाई हो रही है और पानी से कैंसर नहीं फैल रहा।

ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल स्वच्छ पानी की स्थायी व्यवस्था हो, पानी की गहन जांच हो और प्रभावित परिवारों को मदद मिले। यह स्थिति न केवल चिड़ौद बल्कि आसपास के इलाकों के लिए भी चेतावनी है।