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182 करोड़ की कैप्टागॉन जब्त, पहली बार NCB के हाथ लगी तथाकथित ‘जिहादी ड्रग’

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।

नई दिल्ली, भारत में पहली बार नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने कथित तौर पर ‘जिहादी ड्रग’ कहे जाने वाले कैप्टागॉन की बड़ी खेप जब्त की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 182 करोड़ रुपये आंकी गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन RAGEPILL’ के तहत एजेंसियों ने इस सिंथेटिक ड्रग की खेप को पकड़ा, जिसे भारत के रास्ते मिडिल ईस्ट भेजने की तैयारी थी। इस मामले में एक विदेशी नागरिक को भी गिरफ्तार किया गया है। सरकार ने इसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता बताया है।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत ड्रग्स के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रहा है और देश की जमीन का इस्तेमाल कर किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों की तस्करी की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने दोहराया कि भारत में प्रवेश करने वाले या यहां से दूसरे देशों तक पहुंचाने की कोशिश की जाने वाली हर मात्रा में ड्रग्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। शाह ने इस कार्रवाई को देश को नशा मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और एजेंसियों की सतर्कता की सराहना की।

कैप्टागॉन एक सिंथेटिक स्टिमुलेंट ड्रग है, जिसका मूल रासायनिक नाम फेनेथिलीन (Fenethylline) है। इसे 1960 के दशक में कुछ चिकित्सकीय उपयोगों के लिए विकसित किया गया था, लेकिन बाद में इसके गंभीर दुष्प्रभावों और लत लगाने की क्षमता के कारण कई देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया। यह ड्रग शरीर में ऊर्जा बढ़ाने, थकान कम करने और अस्थायी रूप से आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रभाव डाल सकती है। हालांकि, लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से मानसिक विकार, हृदय संबंधी समस्याएं और व्यवहार में गंभीर बदलाव देखे जा सकते हैं।

कैप्टागॉन को ‘जिहादी ड्रग’ कहा जाना कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक नाम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा प्रचलित शब्द है जिसका उपयोग मीडिया रिपोर्ट्स और कुछ सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किया जाता रहा है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कुछ उग्रवादी या हिंसक समूहों ने इस ड्रग का इस्तेमाल किया, क्योंकि इसके प्रभाव से व्यक्ति में डर कम महसूस हो सकता है और आक्रामक व्यवहार बढ़ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि इस नाम को वैज्ञानिक पहचान नहीं माना जाना चाहिए।

जानकारों के अनुसार, इस ड्रग के सेवन के बाद व्यक्ति में नींद की जरूरत कम महसूस हो सकती है, दर्द का असर कम लग सकता है और कुछ समय के लिए ऊर्जा का स्तर बढ़ सकता है। लेकिन इसके लगातार उपयोग से मानसिक संतुलन प्रभावित होने, हिंसक प्रवृत्ति बढ़ने, निर्णय लेने की क्षमता कमजोर पड़ने और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न होने की आशंका रहती है। यही वजह है कि इसे अत्यधिक लत लगाने वाले और खतरनाक नशीले पदार्थों की श्रेणी में रखा जाता है।

कैप्टागॉन का अवैध कारोबार खासतौर पर मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। अरब देशों तक इसकी तस्करी के लिए बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय होने की बात सामने आती रही है। कई रिपोर्टों में इस कारोबार को संगठित अपराध और अवैध फंडिंग नेटवर्क से भी जोड़ा गया है। एजेंसियों का मानना है कि भारत को कई बार ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की जाती है, जिसके जरिए नशीले पदार्थों को दूसरे देशों तक पहुंचाया जाता है।

‘ऑपरेशन RAGEPILL’ के तहत हुई यह कार्रवाई भारत की बढ़ती निगरानी क्षमता और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के खिलाफ सख्त रुख का संकेत मानी जा रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने NCB अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सतर्कता और मेहनत की वजह से इतनी बड़ी खेप पकड़ी जा सकी। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि ड्रग्स नेटवर्क चाहे घरेलू हो या अंतरराष्ट्रीय, भारत में उसके लिए कोई जगह नहीं होगी।