लोकल डेस्क, एन के सिंह।
कार्यस्थल से 'सूचना बोर्ड' गायब होने और जेई के संवेदक पर मनमानी का आरोप लगाने से विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े।
पूर्वी चंपारण: शहर की हृदयस्थली कहे जाने वाले बैंक रोड (वार्ड 6 व 12) के कायाकल्प का सपना अब स्थानीय जनता और व्यापारियों के लिए जी का जंजाल बन चुका है। मुख्यमंत्री शहरी समग्र विकास योजना के तहत 68,85,252 की भारी-भरकम राशि से हो रहे इस निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार और लापरवाही की ऐसी 'इबारत' लिखी जा रही है, जिसने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलम यह है कि मानकों को ताक पर रखकर काली की जगह सफेद गिट्टी का खेल चल रहा था, जिसे कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी ने मौके पर पहुंचकर रंगे हाथों पकड़ा और काम को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया।
मानकों की धज्जियां, बिना GSB और घटिया सामग्री का प्रयोग
निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का आरोप है कि सड़क की खुदाई नियम के अनुसार नहीं की गई है। बिना उचित GSB (Granular Sub-Base) तैयार किए ही सीधे ढलाई की तैयारी की जा रही थी। सबसे चौंकाने वाला मामला निर्माण सामग्री का है; जहाँ मजबूत काली गिट्टी का उपयोग होना था, वहां ठेकेदार विकास आदित्य द्वारा घटिया सफेद गिट्टी बिछाई जा रही थी। निरीक्षण के दौरान कनीय अभियंता (JE) राज कुमार ने भी स्वीकार किया कि संवेदक द्वारा विभागीय निर्देशों की अनदेखी की जा रही है।
कछुआ चाल से व्यापार ठप, पेयजल का गहराया संकट
11 अगस्त 2025 से शुरू हुआ यह कार्य महीनों बीत जाने के बाद भी अधूरा है। सड़क पर बिखरी गिट्टी और मलबे के कारण दुकानदारों के शटर गिर गए हैं। दीपावली और छठ का सीजन पहले ही बर्बाद हो चुका है, और अब व्यापारियों को डर है कि होली और लग्न का सीजन भी इस धूल-धूसरित निर्माण की भेंट चढ़ जाएगा। इतना ही नहीं, निर्माण के दौरान पिछले वर्ष बिछाई गई नल-जल योजना की पाइपलाइन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। पाइप को मानक गहराई (डेढ़ फीट नीचे) पर रखने के बजाय ऊपर ही छोड़कर ढलाई की जा रही है, जिससे मोहल्ले में पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
पारदर्शिता गायब, नियमों का उल्लंघन
सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी कार्यस्थल पर 'सूचना बोर्ड' अनिवार्य है, लेकिन यहाँ लागत और कार्य की जानकारी देने वाला कोई बोर्ड नहीं लगाया गया है। इसके अलावा, नगर परिषद का नियम है कि पहले नाला बनेगा और फिर सड़क, लेकिन यहाँ पटेल पथ से आदर्श चौक तक बिना नाला बनाए ही सीधे पीसीसी ढलाई का प्रयास किया गया। निर्मित नाले की चौड़ाई और गहराई भी पुराने नाले से कम है, जिससे भविष्य में शहर को भीषण जलजमाव का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासनिक रुख और चेतावनी
भ्रष्टाचार की शिकायत पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी ने स्पष्ट किया कि जनता की गाढ़ी कमाई की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, "निर्माण में मानकों से समझौता भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। घटिया सफेद गिट्टी को तुरंत हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है। पूरे मामले को लेकर बुडको (BUIDCO) को पत्र लिखकर अवगत कराया जाएगा और गुणवत्ता सुनिश्चित होने के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया बढ़ेगी।"
स्थानीय नागरिकों और भाजपा नेता राकेश कुशवाहा ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मानकों के अनुरूप कार्य पूर्ण नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। फिलहाल, कार्यस्थल पर तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।







