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97 बैंक खाते रडार पर, 30 मददगारों पर गिरी गाज।

लोकल डेस्क, एन के सिंह।

  • बड़ी कार्रवाई: 'साइबर प्रहार 2.0' के तहत साइबर थानाध्यक्ष अभिनव पाराशर का एक्शन; 'म्यूल अकाउंट्स' के गंदे खेल का पर्दाफाश।

पूर्वी चंपारण: जिले में साइबर अपराधियों के सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक अभियान छेड़ दिया है। बिहार पुलिस की 'साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट' (CCSU) के निर्देश पर चलाए जा रहे 'साइबर प्रहार 2.0' के तहत मोतिहारी पुलिस को एक बड़ी और सनसनीखेज सफलता हाथ लगी है। साइबर थानाध्यक्ष सह पुलिस उपाध्यक्ष अभिनव पाराशर के नेतृत्व में पुलिस ने उन 'सफेदपोश मददगारों' पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जो चंद रुपयों के लालच में अपराधियों को अपना ईमान और बैंक खाता किराए पर दे रहे थे।

क्या है 'म्यूल अकाउंट' का गंदा खेल?

साइबर थानाध्यक्ष अभिनव पाराशर ने इस पूरे खेल का सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि जिले में ठगी का पैसा सीधे मुख्य अपराधियों के पास न जाकर 'म्यूल अकाउंट्स' (Mule Accounts) में आता है।

कैसे फंसते हैं लोग

अपराधी कुछ हजार रुपयों या कमीशन का लालच देकर भोले-भाले ग्रामीणों के बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और यूपीआई (UPI) आईडी अपने कब्जे में ले लेते हैं। इन्हीं खातों के जरिए देश भर में ठगी गई करोड़ों की राशि का ट्रांजेक्शन किया जाता है ताकि मुख्य अपराधी पुलिस की नजरों से बचे रहें।

पुलिसिया कार्रवाई के मुख्य बिंदु: आंकड़ों की जुबानी

  • संदिग्ध खाते चिह्नित 97 (जिनका सीधा संबंध साइबर क्राइम से मिला) 
  • कठोर कार्रवाई 30 व्यक्ति (जिन्होंने अपराधियों को खाते उपलब्ध कराए) प्राथमिकी (FIR) 12 से 13 नए मामले दर्ज अगला कदम फरार अपराधियों के विरुद्ध कुर्की-जब्ती की तैयारी 

सजग नेतृत्व: अपराधियों में हड़कंप, जनता में सराहना

जब से अभिनव पाराशर ने साइबर थाने की कमान संभाली है, अपराधियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। जानकारों का मानना है कि यदि 'सप्लाई चेन' यानी बैंक खातों की उपलब्धता को काट दिया जाए, तो साइबर अपराध पर 80% तक लगाम लग सकती है। पुलिस की यह 'जीरो टॉलरेंस' नीति अब उन बिचौलियों के लिए काल साबित हो रही है जो अपराध की नींव तैयार करते थे।

 "कमीशन के लालच में अपना ईमान और बैंक खाता न बेचें। अपराधियों को अपना एटीएम या यूपीआई देना आपको सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा सकता है। हमारे पास हर संदिग्ध लेन-देन का डिजिटल पदचिह्न मौजूद है।"
 अभिनव पाराशर, साइबर थानाध्यक्ष, मोतिहारी

अंतिम चेतावनी "या तो सरेंडर करें या जेल जाने को तैयार रहें"

पुलिस ने उन खाताधारकों को 'आखिरी मौका' दिया है जिनके बैंक खातों पर संदिग्ध लेन-देन के कारण बैंक द्वारा 'होल्ड' लगाया गया है। ऐसे लोग खुद साइबर थाना आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करें और मुख्य अपराधियों के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस उपाधीक्षक साइबर थाना अध्यक्ष अभिनव पाराशर ने कहा कि, यदि संदिग्ध व्यक्ति स्वयं सामने नहीं आते हैं, तो पुलिस उनके दरवाजे तक पहुँचेगी और उन्हें 'अपराध का सहभागी' मानकर सीधे जेल भेजा जाएगा।