स्टेट डेस्क, मुस्कान कुमारी।
पटना। BPSC द्वारा 20 अप्रैल को आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा और 23 अप्रैल को हुई सहायक अपशिष्ट प्रबंधन एवं लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी परीक्षा में पेपर लीक और बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई है। EOU की जांच में अब तक 8 FIR दर्ज की गई हैं और 35 लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
नई धांधली की तकनीक
EOU के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने शुक्रवार को प्रेस में इस मामले का बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि परीक्षा माफियाओं ने इस बार पूरी तरह नया तरीका अपनाया। पहले प्रिंटिंग प्रेस या ट्रांसपोर्ट स्टाफ के जरिए लीक होता था, लेकिन AEDO मामले में बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी ही मुख्य आरोपी निकले।
BPSC ने बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के लिए जयपुर की मेसर्स साई एडुकेयर प्राइवेट लिमिटेड को ठेका दिया था। जांच में पता चला कि कंपनी के कई जिला कोऑर्डिनेटर और सुपरवाइजर खुद AEDO परीक्षा के अभ्यर्थी थे। इन कर्मचारियों ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने परिजनों और रिश्तेदारों को भी परीक्षा केंद्रों पर बैठाया।
मुंगेर, बेगूसराय, नालंदा, नवादा और पटना के श्रीकृष्णपुरी थाने में अलग-अलग FIR दर्ज हुई हैं। EOU इनमें से पांच मामलों की जांच कर रही है।
कैसे हुई धांधली?
परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले बायोमेट्रिक कर्मचारियों की मिलीभगत से प्रश्न पत्र लीक किया गया। केंद्र के अंदर से ही पेपर बाहर भेजा गया और तकनीकी सहायता से अभ्यर्थियों तक जवाब पहुंचाए गए।
डीआईजी ढिल्लो ने बताया कि इन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने में **रैंडमाइजेशन** की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इससे उन्हें मनचाहा परीक्षा केंद्र मिल गया। मुंगेर के एक केंद्र से बायोमेट्रिक सुपरवाइजर को भी गिरफ्तार किया गया है।
कंपनी पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश
EOU ने BPSC को सिफारिश की है कि ठेका लेने वाली जयपुर कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाए। जांच में पाया गया कि कंपनी के कर्मचारियों ने अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया। उन्हें यह घोषित करना था कि वे या उनके निकटतम रिश्तेदार परीक्षा में अभ्यर्थी नहीं हैं, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट निकली।
दूसरी परीक्षा यानी सहायक अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी परीक्षा में भी गड़बड़ी सामने आई। पटना के एस.के. पुरी थाने में इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
EOU की जांच जारी
EOU की टीम पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए आगे की छानबीन कर रही है। गिरफ्तार सभी 35 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
इस घोटाले ने BPSC की परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आयोग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन EOU की सिफारिश के आधार पर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होने की उम्मीद है।







