Ad Image
Ad Image
पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया || PM के आवास के बाहर पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर धरने पर राहुल गांधी || PM मोदी के आवास के बाहर धरने पर राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी दिग्गज || अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

CAG रिपोर्ट: अम्फान राहत कोष में गड़बड़ी

स्टेट डेस्क, श्रेया पाण्डेय 

पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में मई 2020 में आए सुपर साइक्लोन अम्फान के बाद बांटी गई राहत राशि में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग की एक ताज़ा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य सरकार द्वारा किया गया नुकसान का आकलन बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था, हजारों लाभार्थियों को एक से अधिक बार भुगतान कर दिया गया, और राहत राशि बांटने के लिए पुरानी तथा अप्रासंगिक लाभार्थी सूचियों का इस्तेमाल किया गया। यह रिपोर्ट राज्य विधानसभा में पेश की गई कैग की उन 28 रिपोर्टों में शामिल है, जो लगभग चार साल के लंबे अंतराल के बाद सदन के पटल पर रखी गईं।

गौरतलब है कि 20 मई 2020 को अम्फान चक्रवात ने पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों से टकराकर भारी तबाही मचाई थी। इस तूफान ने राज्य के 16 जिलों को प्रभावित किया था और राज्य की करीब 60 प्रतिशत आबादी इससे प्रभावित हुई थी। इस आपदा में 99 लोगों की जान गई थी, जबकि घरों, खेती, मत्स्य पालन, वनों, बिजली ढांचे, सिंचाई नहरों, स्वास्थ्य सुविधाओं और उद्योगों को भारी नुकसान पहुंचा था। नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) से 35,018 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी, जिसके एवज में केंद्र सरकार ने केवल 2,707.77 करोड़ रुपये की सहायता की सिफारिश की, वह भी राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) में मौजूद शेष राशि के 50 प्रतिशत के समायोजन की शर्त के साथ।

कैग की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के आपदा प्रबंधन एवं सिविल डिफेंस विभाग द्वारा तैयार किए गए क्षति आकलन को सत्यापित नहीं किया जा सका, क्योंकि जिलावार आकलन रिपोर्टें ऑडिट के लिए उपलब्ध ही नहीं कराई गईं। इसके अलावा, ऑडिट में यह भी सामने आया कि 9,200 से अधिक लाभार्थियों को 18.07 करोड़ रुपये की राशि कई-कई बार भुगतान कर दी गई। एक और गंभीर अनियमितता में पाया गया कि बागवानी सहायता के तहत 5,627 लाभार्थियों को 2.82 करोड़ रुपये का भुगतान ऐसी सूची के आधार पर किया गया, जो वास्तव में नवंबर 2019 में आए चक्रवात बुलबुल के पीड़ितों के लिए तैयार की गई थी, न कि अम्फान प्रभावितों के लिए।

रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस पूरी राहत प्रक्रिया के दौरान क्षति के आकलन, लाभार्थियों की पहचान और वित्तीय नियंत्रण के स्तर पर गंभीर खामियां पाई गईं। यह मामला एक बार फिर आपदा राहत कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करता है, ताकि भविष्य में वास्तविक जरूरतमंदों तक सही समय पर उचित सहायता पहुंच सके और सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके। यह रिपोर्ट राज्य सरकार और प्रशासनिक तंत्र दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।