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CBSE की अनियमितताओं से उजागर हुई धर्मेंद्र प्रधान की अक्षमता: कांग्रेस

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।

नयी दिल्ली: कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की परीक्षा प्रणाली, ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) व्यवस्था और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में सामने आई गड़बड़ियां शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। पार्टी का कहना है कि इन घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था के संचालन में मौजूद खामियों को उजागर कर दिया है और इससे मंत्रालय की जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगा है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने बयान में कहा कि शिक्षा मंत्रालय से जुड़े विभिन्न मामलों में लगातार नई जानकारियां सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुनर्मूल्यांकन पोर्टल के संचालन के लिए चुनी गई निजी कंपनी द्वारा निविदा प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत किए गए साइबर सुरक्षा प्रमाणपत्रों में गंभीर त्रुटियां पाई गई थीं, जिन पर समय रहते उचित ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक प्रमाणपत्र किसी अन्य ग्राहक से संबंधित था और उसकी वैधता भी समाप्त हो चुकी थी, जबकि दूसरा प्रमाणपत्र केवल अस्थायी एप्लिकेशन के सीमित ऑडिट के आधार पर जारी किया गया था। कांग्रेस का आरोप है कि इन तथ्यों के बावजूद संबंधित एजेंसी को उच्च दरों पर कार्य आवंटित किया गया, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

पार्टी ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2025 की शुरुआत में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने पुनर्मूल्यांकन पोर्टल में मौजूद गंभीर तकनीकी कमजोरियों की ओर ध्यान आकर्षित किया था। कांग्रेस के अनुसार इन खामियों को लेकर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई और लंबे समय तक संबंधित पक्षों द्वारा इन चिंताओं को गंभीरता से स्वीकार नहीं किया गया, जिसके कारण छात्रों और अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी रही।

कांग्रेस का कहना है कि बाद में परिस्थितियां ऐसी बनीं कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए उपयोग किए जा रहे प्लेटफॉर्म को छोड़कर अलग व्यवस्था विकसित करनी पड़ी। पार्टी के अनुसार यदि परीक्षा प्रबंधन, मूल्यांकन प्रणाली और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की गई होती तो लाखों विद्यार्थियों तथा उनके परिवारों को अनावश्यक परेशानियों और तकनीकी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता।

श्री रमेश ने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली में मौजूद कमियों को उजागर किया है। उनका कहना है कि परीक्षा और मूल्यांकन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी दक्षता सुनिश्चित करना मंत्रालय की जिम्मेदारी है, लेकिन सामने आए घटनाक्रम इस दिशा में गंभीर चूक की ओर संकेत करते हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि यह मामला केवल तकनीकी खामियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे शिक्षा प्रशासन की कार्यकुशलता और निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष समीक्षा कर जिम्मेदारियों को तय किया जाए, ताकि भविष्य में छात्रों के हितों से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण मामलों में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।