स्टेट डेस्क, एन के सिंह।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में आधुनिक पर्यटन केंद्र का शिलान्यास, गोनौली और चिउटाहां में गिद्ध संरक्षण केंद्रों का हुआ भव्य उद्घाटन।
मुख्यमंत्री ने स्वयं हरी झंडी दिखाकर नई जंगल सफारी को किया रवाना, दोन नहर और लवकुश पार्क की प्रगति का मुख्यमंत्री ने लिया जायजा।
वाल्मीकिनगर/बगहा: उत्तर बिहार का वह सुदूर कोना, जहाँ हिमालय की तराई और गंडक की कल-कल करती लहरें एक साथ मिलती हैं, रविवार को सूबे के विकास की नई पटकथा का गवाह बना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी 'प्रगति यात्रा' के क्रम में जब वाल्मीकिनगर की हसीन वादियों में पहुंचे, तो उनके संकल्पों में चंपारण के कायाकल्प की एक स्पष्ट झलक दिखाई दी। मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि इस सीमावर्ती क्षेत्र को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की एक बड़ी छलांग है।
पर्यटन और पर्यावरण: जब विकास ने ओढ़ी हरियाली की चादर
मुख्यमंत्री ने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) के भीतर बहुप्रतीक्षित 'इको-पर्यटन केंद्र' का शिलान्यास किया। इस परियोजना के पूरा होने के बाद प्रकृति प्रेमियों को यहाँ विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी, जिससे विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी भारी इजाफा होने की उम्मीद है। पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक भावुक पहल करते हुए मुख्यमंत्री ने गोनौली और चिउटाहां में 'गिद्ध संरक्षण केंद्रों' का उद्घाटन किया। विलुप्त होते गिद्धों को बचाने की यह कवायद बिहार सरकार की दूरगामी सोच को दर्शाती है। इसके तुरंत बाद, जब मुख्यमंत्री ने नई जंगल सफारी गाड़ियों को हरी झंडी दिखाई, तो पूरा इलाका पर्यटकों की तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अब बाघों की दुनिया को करीब से देखना सैलानियों के लिए और भी आसान और सुरक्षित होगा।
जमीनी हकीकत का जायजा: पैदल चले विकास के 'भगीरथ'
नीतीश कुमार अपने स्वभाव के अनुरूप केवल फीता काटकर नहीं रुके, बल्कि उन्होंने कार्यों की गुणवत्ता परखने के लिए कमान खुद संभाली। उन्होंने दोन नहर शाखा सेवा पथ के पुनर्स्थापन कार्य का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान वे पैदल चलकर निर्माण कार्य की बारीकी देखते नजर आए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देश दिए कि गुणवत्ता में रत्ती भर भी समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और किसानों के हित में इसे समय सीमा के भीतर पूरा करना होगा।
सियासी दिग्गजों का जमावड़ा और भविष्य की रणनीति
लवकुश पार्क के सौंदर्य को निहारते हुए मुख्यमंत्री ने इसे और अधिक निखारने के निर्देश दिए। इस दौरान उनके साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। मंत्रियों की इस मौजूदगी ने साफ कर दिया कि सरकार वाल्मीकिनगर को बिहार का सबसे बड़ा 'पर्यटन हब' बनाने के लिए कितनी गंभीर है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया और क्षेत्र की समस्याओं को उनके समक्ष रखा, जिस पर मुख्यमंत्री ने त्वरित संज्ञान लेने का आश्वासन दिया।
वाल्मीकिनगर की इन वादियों में आज विकास की जो गूंज सुनाई दी है, वह आने वाले समय में यहाँ की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर को बदलने वाली साबित होगी। चंपारण की इस ऐतिहासिक धरती से मुख्यमंत्री ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि उनके लिए पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक विकास एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।







