स्टेट डेस्क, एन के सिंह।
वर्दी के 'दागियों' पर डीजीपी का 'डिजिटल स्ट्राइक', सरदार पटेल भवन से गूंजा अनुशासन का महामंत्र
पटना: बिहार पुलिस की कार्यशैली और अनुशासन को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा संदेश सीधे मुख्यालय से निकला है। पटना के 'सरदार पटेल भवन' के ऑडिटोरियम में बुधवार को नजारा कुछ अलग था। मौका तो एक उच्चस्तरीय प्रशिक्षण शिविर का था, लेकिन बिहार पुलिस के मुखिया डीजीपी विनय कुमार के तेवरों ने इसे 'शुद्धिकरण अभियान' में बदल दिया। डीजीपी ने साफ कर दिया है कि सूबे में अब केवल अपराधियों पर ही नहीं, बल्कि वर्दी की आड़ में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता करने वाले 'भीतरघातियों' पर भी गाज गिरेगी।
मिशन 'क्लीन खाकी' की 5 बड़ी बातें
अपराधियों के साथ-साथ भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं।
थाने आने वाले पीड़ित को न्याय की उम्मीद, दुर्व्यवहार करने वाले अफसरों पर होगी कठोर कार्रवाई।
दागी अफसरों को सेवा से बाहर करने के लिए विभागीय जांच में आएगी तेजी।
एसपी, एएसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारियों को दी गई सख्त चेतावनी।
निष्पक्ष जांच ही पुलिस की असली ताकत, रसूखदारों को बचाने वालों की अब खैर नहीं।
जब मुख्यालय में मथा गया अनुशासन का अमृत
बिहार पुलिस अब खुद को अंदर से साफ करने के एक बड़े मिशन पर है। डीजीपी विनय कुमार ने मंच से स्पष्ट संदेश दिया कि "पुलिस का इकबाल उसकी वर्दी नहीं, बल्कि जनता का भरोसा है।" उन्होंने अधिकारियों को आईना दिखाते हुए कहा कि जब कोई पीड़ित अपनी फरियाद लेकर थाने की चौखट पर आता है, तो वह खाकी में 'भगवान' और 'न्याय' ढूंढता है। ऐसे में अगर कोई पुलिस पदाधिकारी अपनी मर्यादा भूलकर भ्रष्टाचार का रास्ता चुनता है, तो वह केवल नियम नहीं तोड़ रहा, बल्कि पूरे तंत्र का विश्वास कत्ल कर रहा है।
विभागीय जांच की 'सर्जिकल स्ट्राइक'
इस शिविर में केवल ट्रेनिंग नहीं दी गई, बल्कि उन अधिकारियों की लिस्ट तैयार करने का संकेत दिया गया जो कानून की आड़ में मनमानी करते हैं। मुख्य अतिथि दीपक कुमार सिंह (महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त) और विशिष्ट अतिथि अरविंद चौधरी (अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग) की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि सरकार अब विभागीय जांचों को लटकाने के पक्ष में नहीं है। अब तकनीक और निष्पक्षता के मेल से भ्रष्ट अधिकारियों को चिन्हित कर उन्हें पदमुक्त करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
अपराधियों में डर, जनता में सुरक्षा का भाव
डीजीपी के इस कड़े रुख से एक बात साफ है—बिहार पुलिस अब एक 'संवेदनशील फोर्स' बनने की दिशा में है। राज्य के विभिन्न जिलों से आए पुलिस कप्तानों और वरिष्ठ अधिकारियों को यह कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मियों के आचरण पर पैनी नजर रखें। डीजीपी ने जोर देकर कहा कि अगर जांच निष्पक्ष हो, तो अपराधी चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, वह कानून के फंदे से बच नहीं सकता।
"वर्दी की गरिमा सबसे ऊपर है। जो अधिकारी जनता के साथ अभद्र व्यवहार करेंगे या भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई नहीं, बल्कि 'गाज' गिरेगी।"
विनय कुमार, डीजीपी, बिहार
सरदार पटेल भवन में हुआ यह मंथन आने वाले दिनों में बिहार की सड़कों और थानों में बड़े बदलाव का गवाह बनेगा। अब देखना यह है कि मुख्यालय के इस 'हंटर' के बाद जिलों में तैनात पुलिस पदाधिकारी अपनी कार्यप्रणाली में कितनी ईमानदारी और तेजी लाते हैं।







