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Gen-Z को गंजापन की मार: 20 की उम्र में बाल झड़ने लगे

स्टेट डेस्क, मुस्कान कुमारी।

नई दिल्ली। कॉलेज के छात्र और नौकरीपेशा युवा अब बालों के झड़ने से पहले ही परेशान दिख रहे हैं। शहरों की डर्मेटोलॉजी क्लिनिकों में 18 से 25 साल के बीच के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जहां पहले यह समस्या 40-50 की उम्र में आती थी।

तनाव और जीवनशैली बन रहे बड़े दुश्मन

डॉक्टरों के मुताबिक, यह सिर्फ सौंदर्य की चिंता नहीं, बल्कि गंभीर जीवनशैली का नतीजा है। क्रॉनिक स्ट्रेस हार्मोनल बैलेंस बिगाड़ता है, जिससे बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और झड़ना शुरू हो जाता है। पढ़ाई-नौकरी की होड़, अनिश्चित भविष्य, अनपेड इंटर्नशिप और लगातार दबाव युवाओं को लंबे समय तक तनाव में रखते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर तनाव को सबसे पहले बालों के जरिए जाहिर करता है। बालों की जड़ें इन बदलावों के प्रति बहुत संवेदनशील होती हैं।

डिजिटल जीवन और अनियमित आदतें बढ़ा रही समस्या

रात देर तक मोबाइल-स्क्रीन का इस्तेमाल सर्कैडियन रिदम बिगाड़ता है, कोर्टिसोल लेवल बढ़ाता है और हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है। अनियमित नींद, कैफीन की अधिकता, क्रैश डाइटिंग और फिजिकल एक्टिविटी की कमी इस समस्या को और गंभीर बनाती है।

सोशल मीडिया पर वायरल रील्स और इंस्टेंट रिजल्ट देने वाले प्रोडक्ट्स युवाओं में घबराहट बढ़ा रहे हैं। कई लोग बिना जांच के सप्लीमेंट्स, इंजेक्शन या आईवी थेरेपी अपनाते हैं, जो अक्सर नुकसानदायक साबित होते हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी: शॉर्टकट से बचें

डर्मेटोलॉजिस्ट बताते हैं कि जेनेटिक्स अभी भी सबसे बड़ा कारण है, लेकिन लाइफस्टाइल फैक्टर इसे बहुत पहले ट्रिगर कर रहे हैं। कई स्टडीज में पाया गया है कि भारत में 25 साल से कम उम्र के आधे से ज्यादा पुरुषों को बालों का झड़ना शुरू हो जाता है।

तनाव से जुड़ी टेलोजन एफ्लुवियम जैसी स्थिति तीन महीने बाद दिखाई देती है, जहां अचानक बड़े पैमाने पर बाल झड़ते हैं।

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि असली इलाज जड़ से हो - संतुलित पोषण, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और समय पर डॉक्टरी जांच। टॉपिकल ट्रीटमेंट जैसे मिनॉक्सिडिल और जीवनशैली में बदलाव लंबे समय तक फायदेमंद साबित होते हैं।

आईवी ड्रिप्स या लग्जरी वेलनेस थेरेपी अस्थायी चमक दे सकती हैं, लेकिन बालों की जड़ों को ठीक नहीं करतीं। बार-बार बिना निगरानी के ऐसे उपचार इंफेक्शन, विटामिन टॉक्सिसिटी या अन्य जोखिम पैदा कर सकते हैं।

यह ट्रेंड जनरेशन Z के लिए सिर्फ बालों का मसला नहीं, बल्कि पूरी जीवनशैली पर सवाल है। युवा पीढ़ी दिमाग के साथ-साथ स्कैल्प पर भी तनाव ढो रही है। समय रहते ध्यान न दिया तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।