नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में सामने आई उच्च क्षमता वाली सैटेलाइट तस्वीरों से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने बुनियादी ढांचे और सड़क नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है। रक्षा विशेषज्ञों और भू-स्थानिक खुफिया (Geospatial Intelligence) शोधकर्ताओं द्वारा साझा की गई इन तस्वीरों से साफ पता चलता है कि चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास अपनी सैन्य गतिशीलता और रसद आपूर्ति को मजबूत करने के लिए लगातार सड़कों और गांवों का निर्माण कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन की इस नई निर्माण गतिविधि का उद्देश्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के लिए बेहतर आवाजाही और त्वरित तैनाती सुनिश्चित करना है।
सैटेलाइट डेटा के विस्तृत विश्लेषण से पता चलता है कि चीन ने एक नई सड़क का निर्माण किया है, जो साल 2021 में चिन्हित किए गए एक चीनी सीमावर्ती गांव को उसके पश्चिम में लगभग 9.4 किलोमीटर दूर स्थित एक अन्य नई बस्ती से जोड़ती है। इन नई बस्तियों में न केवल पक्की सड़कें, बल्कि कई बहुमंजिला इमारतें, दो हेलिपैड, सौर ऊर्जा पैनल और भारी वाहन (ट्रक और निर्माण उपकरण) भी देखे गए हैं। हालांकि यह पूरा इलाका ऐतिहासिक रूप से मैकमोहन रेखा के तहत भारत के दावे वाले क्षेत्र में आता है, लेकिन भौगोलिक और ऐतिहासिक रूप से यह विशिष्ट हिस्सा 1959 के युद्ध के समय से ही चीनी नियंत्रण में रहा है। इस वजह से इसे भारत के वर्तमान प्रशासनिक क्षेत्र में ताजा घुसपैठ नहीं, बल्कि चीन द्वारा अपने कब्जे वाले क्षेत्र में सैन्य सुदृढ़ीकरण माना जा रहा है।
इस बीच, अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के स्थानीय आदिवासी समुदायों और 'नाह वेलफेयर सोसाइटी' ने चिंता व्यक्त की थी कि चीनी सेना धीरे-धीरे उनके पारंपरिक चरागाहों और शिकार के मैदानों की ओर बढ़ रही है। हालांकि, भारतीय सेना ने स्थानीय संगठनों के इन दावों और हालिया चीनी अतिक्रमण की खबरों को पूरी तरह से 'निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत' करार दिया है। भारतीय सैन्य सूत्रों का कहना है कि सीमा पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और चीनी गतिविधियां पूरी तरह से एलएसी के उस पार (चीन की ओर) तक ही सीमित हैं। दोनों देशों के बीच सीमा का औपचारिक रूप से सीमांकन न होने के कारण दोनों पक्षों की धारणाएं अलग-अलग हैं, जिसके चलते ऐसी चिंताएं अक्सर सामने आती हैं।
चीन की इस आक्रामक 'सैलमी स्लाइसिंग' और सीमा पर गांवों (जिन्हें वे 'शियाओकांग' या समृद्ध गांव कहते हैं) को बसाने की नीति के जवाब में भारत सरकार ने भी अपनी सीमाई तैयारियों को अत्यधिक तेज कर दिया है। भारत ने अरुणाचल प्रदेश में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए 1,748 किलोमीटर लंबी महत्वाकांक्षी 'अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे' परियोजना पर काम तेज कर दिया है। इसके अलावा, केंद्र सरकार के 'वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम' (Vibrant Villages Programme) के तहत सीमावर्ती भारतीय गांवों में नागरिक सुविधाएं, बिजली और सड़कों का विकास किया जा रहा है ताकि स्थानीय आबादी का पलायन रोका जा सके और सुरक्षा बलों को रणनीतिक बढ़त मिल सके। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी रहने के बावजूद, जमीन पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की यह होड़ आने वाले समय में सीमा पर सैन्य संतुलन को निर्धारित करेगी।







