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NCRB रिपोर्ट 2024: देश में अपराध घटे पर साइबर क्राइम में भारी उछाल

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।

नई दिल्ली, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की वर्ष 2024 की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल अपराध के मामलों में 6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, लेकिन साइबर अपराधों में तेज़ बढ़ोतरी चिंता का विषय बनकर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2023 में दर्ज 62.41 लाख मामलों की तुलना में 2024 में कुल 58.85 लाख मामले दर्ज किए गए। वहीं साइबर अपराधों के मामलों में करीब 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अपराध दर भी घटकर प्रति लाख आबादी पर 448.3 से 418.9 हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक अपराधों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। वर्ष 2023 में आर्थिक अपराधों के 2,04,973 मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 2,14,379 तक पहुंच गए। इनमें जालसाजी, धोखाधड़ी और ठगी (FCF) के मामलों का दबदबा रहा। इस श्रेणी में 1,92,382 मामले दर्ज किए गए, जो कुल आर्थिक अपराधों का लगभग 90 प्रतिशत है। इसके अलावा आपराधिक विश्वास भंग (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) के 21,251 मामले भी सामने आए।

साइबर अपराधों के आंकड़ों में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में साइबर अपराध के कुल 1,01,928 मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 86,420 थी। इस तरह मामलों में 17.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। साइबर अपराध दर भी बढ़कर 6.2 से 7.3 हो गई। इन मामलों में सबसे अधिक 72.6 प्रतिशत मामले धोखाधड़ी से जुड़े रहे, जिनकी संख्या 73,987 रही। इसके अलावा यौन शोषण के 3,190 मामले और जबरन वसूली के 2,536 मामले दर्ज किए गए।

रिपोर्ट में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। वर्ष 2024 में देशभर में 98,375 बच्चे लापता हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 91,296 थी। इस तरह मामलों में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। लापता बच्चों में 75,603 लड़कियां, 22,768 लड़के और चार ट्रांसजेंडर बच्चे शामिल रहे। वहीं हत्या के मामलों में मामूली गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2024 में हत्या के 27,049 मामले दर्ज हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.4 प्रतिशत कम हैं। रिपोर्ट के अनुसार हत्या के पीछे मुख्य कारण झगड़े, निजी रंजिश और फायदे के लिए किए गए अपराध रहे।

महिलाओं के खिलाफ अपराधों में हल्की कमी दर्ज की गई है। NCRB के अनुसार वर्ष 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4.41 लाख मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 4.48 लाख थी। इस तरह मामलों में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई। रिपोर्ट में कहा गया कि महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक अपराध पति या रिश्तेदारों द्वारा की गई क्रूरता से जुड़े रहे। इसके बाद अपहरण, नाबालिगों के खिलाफ अपराध और महिलाओं की गरिमा भंग करने की नीयत से किए गए हमलों के मामले सामने आए। महिलाओं के खिलाफ अपराध दर भी घटकर प्रति लाख महिला आबादी पर 66.2 से 64.6 हो गई।

अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ अपराधों में भी कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार SC समुदाय के खिलाफ कुल 55,698 मामले दर्ज हुए, जो वर्ष 2023 के 57,789 मामलों की तुलना में 3.6 प्रतिशत कम हैं। वहीं ST समुदाय के खिलाफ अपराधों में 23.1 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और मामलों की संख्या 12,960 से घटकर 9,966 रह गई। SC समुदाय के खिलाफ सबसे अधिक 14,642 मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए। इसके बाद मध्य प्रदेश में 7,765 और बिहार में 7,549 मामले सामने आए। केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली में सबसे अधिक मामले दर्ज हुए, जबकि जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ में अपेाकृत कम मामले सामने आए।

रिपोर्ट में विदेशियों से जुड़े अपराधों के आंकड़े भी जारी किए गए हैं। विदेशियों के खिलाफ अपराधों में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और मामलों की संख्या 238 से बढ़कर 257 हो गई। इनमें चोरी के 62 मामले और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत 25 मामले प्रमुख रहे। रिपोर्ट के अनुसार कुल 317 पीड़ितों में 64 प्रतिशत एशियाई देशों से और 15.1 प्रतिशत अफ्रीकी देशों से थे। वहीं अपराध में शामिल विदेशियों की संख्या भी 9.7 प्रतिशत बढ़कर 2,792 हो गई। इनमें सबसे अधिक मामले विदेशी अधिनियम और विदेशियों के पंजीकरण अधिनियम के तहत दर्ज किए गए, जबकि बड़ी संख्या में मामले पासपोर्ट अधिनियम के अंतर्गत भी सामने आए।