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NEET ‘इंजन-बोगी’ गैंग का मास्टरमाइंड निकला RJD नेता!

स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना ।

पटना/दिल्ली । NEET फर्जीवाड़े में दिल्ली पुलिस ने RJD नेता संतोष जायसवाल को दिल्ली से अरेस्ट किया है। उसकी निशानदेही पर एक होटल से 20 बच्चों को मुक्त कराया गया है। जायसवाल के साथ 3 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है।

NEET फर्जीवाड़े में जिस संतोष जायसवाल को पुलिस किंगपिन मान रही है, वह बिहार के मोतिहारी का रहने वाला है। मेडिकल परीक्षा का सेटर स्कॉलर्स/सॉल्वर्स को 'इंजन' के रूप में और पैसे देने वाले कैंडिडेट्स को 'बोगी' के रूप में इस्तेमाल करता था। उम्मीदवारों से एक साथ आवेदन करवाया जाता था, ताकि उनके रोल नंबर लगातार क्रम में आएं। वे एक ही परीक्षा हॉल में बैठ सकें। परीक्षा हॉल में 'इंजन' (सॉल्वर) अपने पीछे बैठे 'बोगी' (कैंडिडेट्स) को जवाब इशारों में या बोलकर बता देता था। परीक्षा से एक रात पहले कैंडिडेट्स को एक होटल के कमरे में बंद कर दिया जाता था। उन्हें उत्तर रटाया जाता था। सेटर के भरोसेमंद साथी अगली सुबह सभी कैंडिडेट्स को परीक्षा केंद्र पर छोड़ देते थे। वह बाद में किसी भी धोखाधड़ी को रोकने के लिए उनके एडमिट कार्ड अपने पास रख लेता था। परीक्षा से पहले पोस्ट-डेटेड चेक और स्टूडेंट्स के सभी ओरिजिनल डॉक्यूमेंट को अपने पास रख लेता था। बाद में तय डील के हिसाब से नकद में पूरा पैसा मिलने के बाद सब कुछ लौटा देता था।

दिल्ली पुलिस की जानकारी के मुताबिक 2 मई को सूरत पुलिस की मदद से NEET पेपर में बड़ी धांधली का इनपुट मिला। दिल्ली पुलिस ने महिपालपुर के 100 होटल में रेड मारकर 3 आरोपी गिरफ्तार किए। यहां से पुलिस को मास्टर माइंडसंतोष जायसवाल का पता मिला। संतोष की गिरफ्तारी और निशानदेही पर गाजियाबाद के एक होटल से 20 NEET एस्पिरेंट्स और कई बच्चों के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट और ब्लैंक चेक मिले।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक NEET-2026 की 3 मई को आयोजित होने वाली परीक्षा से एक दिन पहले सभी एस्पिरेंट्स को एक होटल में रखकर कुछ सवाल याद कराए जा रहे थे। ऐसा दावा किया जा रहा था कि यही सवाल NEET की परीक्षा में पूछे जाएंगे।संतोष जायसवाल बिहार के मोतिहारी जिले के बसवरिया गांव का रहने वाला है। संतोष 4 भाइयों में सबसे बड़ा है। घर की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य थी। पिता सिनेमा हॉल में ऑपरेटर (रील को ऑपरेट करने वाले) का काम करते थे। सैटेलाइट व्यवस्था विकसित होने के बाद वे बेरोजगार हो गए थे। मोतिहारी में स्कूल की पढ़ाई पूरी होने के बाद संतोष आगे की पढ़ाई के लिए पटना आया। यहां इसकी मुलाकात तब के सबसे बड़े परीक्षा माफिया से हुई।

सूत्रों की मानें तो दिल्ली में संतोष का मेडिसिन का बड़ा बिजनेस है। इसी की आड़ में इसने अपने काले कारोबार का साम्राज्य खड़ा किया। आमदनी का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि दिल्ली के सबसे महंगे इलाके कहे जाने वाले ईस्ट ऑफ कैलाश में इसका बंगला है। इसके अलावा भी उसके नाम कई प्रॉपर्टी हैं।परीक्षा की सेटिंग और बिजनेस से पैसा कमाने के बाद संतोष जायसवाल अब पावर हासिल करना चाहता था। इसके लिए उनसे सियासत की राह चुनी। 2020 के विधानसभा चुनाव में पहले उसने अपने भाई राजन जायसवाल को अपने गृह विधानसभा क्षेत्र ढाका से चुनाव मैदान में उतारा। राजन प्लुरल्स पार्टी से चुनाव लड़े, लेकिन जमानत तक नहीं बचा पाए।

इसके बाद संतोष ने राजद की सदस्यता ली। पार्टी जॉइन करने के बाद उसे राष्ट्रीय सचिव पद मिला। ढाका से भाई की करारी शिकस्त के बाद संतोष ने विधानसभा रक्सौल को अपना पॉलिटिकल बेस बनाने की कोशिश की। अपनी पूरी फिल्डिंग सजाई। संतोष ने 2025 के विधानसभा चुनाव में टिकट हासिल करने की भरसक कोशिश की थी। काफी पैसे खर्च करने के बाद भी नाकाम रहा। चुनाव में रक्सौल का टिकट नहीं मिला। इसके बाद संतोष दिल्ली पहुंच गया और राजद के राष्ट्रीय दफ्तर में काम संभालने लगा। दिल्ली में राजद को कवर करने वाले पत्रकारों की मानें तो यह राजद दफ्तर में रोज एक बार जरूर पहुंचता था।