नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार।
प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने हाल में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। गुरुवार (5 फरवरी, 2026) को दायर याचिका में पार्टी ने विशेष रूप से बिहार सरकार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर आपत्ति जताई है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि आचार संहिता लागू रहने के दौरान सरकार ने 25–35 लाख महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए और साथ ही नए लाभार्थियों को भी योजना में शामिल किया, जो कानून के खिलाफ है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को 'अवैध' बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। पार्टी ने मांग की है कि पिछले साल हुए इन चुनावों को रद्द कर राज्य में नए सिरे से (फ्रेश इलेक्शंस) मतदान कराया जाए।
याचिका में कोर्ट से आग्रह किया गया है कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह सत्ताधारी दलों द्वारा चुनाव को प्रभावित करने वाली मुफ्त या कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करे। जनसुराज ने अवैध प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए रिट याचिका दाखिल की है और कहा है कि आचार संहिता के दौरान सीधे खातों में राशि भेजना नियमों का उल्लंघन है।
बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए 6 और 11 नवंबर को मतदान हुआ था, जबकि 14 नवंबर को परिणाम घोषित किए गए। याचिका पर शुक्रवार, 6 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ सुनवाई करेगी। जनसुराज ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करते हुए मांग की है कि आचार संहिता के दौरान लाभार्थियों को धन हस्तांतरण और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया को गैरकानूनी घोषित किया जाए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन है। साथ ही चुनाव आयोग को अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत कार्रवाई करने के निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव के दौरान 25–35 लाख महिला मतदाताओं को 10-10 हजार रुपये दिए गए और जीविका स्वयं सहायता समूह की 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को दोनों चरणों में पोलिंग बूथ पर तैनात किया गया, जो नियमों के विरुद्ध है।
जनसुराज ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए बिहार चुनाव दोबारा कराने और मुफ्त योजनाओं व डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर से जुड़ी स्कीमों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तय करने की मांग की है। इसके अलावा, पार्टी ने यह भी आग्रह किया है कि सत्ताधारी दलों को ऐसी योजनाओं की घोषणा चुनाव से कम से कम छह महीने पहले ही करनी चाहिए। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत 26 सितंबर, 2025 को की गई थी।







