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PM मोदी को चुनौती ‘हिम्मत है तो ट्रेड डील रद्द करें’ : राहुल गांधी

नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार।

भोपाल। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में मंगलवार को राजधानी भोपाल में कांग्रेस द्वारा किसान महाचौपाल का आयोजन किया गया। अटल पथ पर हुए इस सम्मेलन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे शामिल हुए। दोनों नेता अपराह्न लगभग तीन बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचे, जहां प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने मंच पर उनका स्वागत किया। सम्मेलन के दौरान सागर से आई एक महिला कार्यकर्ता ‘इंडिया नॉट फॉर सेल’ लिखी टी-शर्ट पहनकर विरोध जताती दिखाई दी।

राहुल गांधी का आरोप - नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका गया

सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील के जरिए देश को बेच दिया। इस समझौते में देश का डेटा सौंप दिया गया और किसानों व टेक्सटाइल उद्योग के हितों से समझौता किया गया।
राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को गलत ठहराया है। भोपाल की सभा से प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि यदि उनमें साहस है तो अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को रद्द करके दिखाएं।

संसद और सीमा से जुड़ा मुद्दा

राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद नेता प्रतिपक्ष को बोलने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार उन्हें बार-बार रोका गया। उन्होंने नरवाडे जी की किताब का हवाला देते हुए कहा कि जब चीन के टैंक भारतीय सीमा के भीतर प्रवेश कर रहे थे, तब सेना प्रमुख ने रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश मंत्री से दिशा-निर्देश मांगे, लेकिन कहीं से कोई स्पष्ट आदेश नहीं मिला। उन्होंने कहा कि युद्ध से जुड़ा फैसला राजनीतिक होता है, जो प्रधानमंत्री को लेना होता है, लेकिन उस दिन सरकार ने सेना को अकेला छोड़ दिया।

चार माह रुकी रही डील, अचानक हुआ समझौता

राहुल गांधी ने कहा कि चार महीने तक कृषि से जुड़े मुद्दों पर भारत-अमेरिका समझौता रुका रहा। सरकार भी नहीं चाहती थी कि अमेरिकी अनाज भारत में बिके। संसद में उनका भाषण समाप्त होते ही प्रधानमंत्री ने ट्रंप को फोन किया और ट्रंप ने ट्वीट कर डील साइन होने की जानकारी दे दी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री संसद और कैबिनेट से बिना चर्चा किए वहां से चले गए।

एपस्टीन फाइल्स और अदानी का ज़िक्र

राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका में लाखों एपस्टीन फाइल्स बंद पड़ी हैं। कुछ नाम सामने आए हैं, कई अब भी छिपे हुए हैं। उन्होंने कहा कि भोपाल में हर जगह अदानी का नाम दिखाई देता है और अदानी भाजपा का वित्तीय ढांचा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अदानी अमेरिका नहीं जा सकते क्योंकि वहां उन पर केस है और असल निशाना अदानी नहीं बल्कि प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि यह बात केवल वे नहीं, बल्कि आरएसएस और भाजपा कार्यकर्ताओं के मन में भी है।

‘डील नहीं, किसानों के दिल में कील’

राहुल गांधी ने कहा कि यह कोई डील नहीं बल्कि किसानों के दिल में कील है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका की अदालत टैरिफ को गलत बता चुकी है। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे ज्यादा डेटा भारत के पास है और भारत के डेटा के बिना अमेरिका चीन से मुकाबला नहीं कर सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि इस समझौते से देश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री तबाह हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि ट्रंप भारत से नौ लाख करोड़ रुपये का सामान खरीदने की बात कर रहे हैं, जबकि भारत ने अमेरिका से कुछ नहीं लिया। राहुल गांधी ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री पर दबाव और धमकी न होती तो यह डील नहीं होती। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता किसी से डरने वाले नहीं हैं।

खरगे का मोदी पर हमला

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री को ‘सरेंडर मोदी’ कहते हुए कहा कि ट्रेड डील के बाद देश कठिन दौर से गुजर रहा है और संविधान खतरे में है। उन्होंने कहा कि पहले ट्रंप को दोस्त कहने वाले प्रधानमंत्री आज उनके सामने झुक गए हैं। खरगे ने कहा कि देशभक्ति किसानों और युवाओं में है, जबकि प्रधानमंत्री खुद अपनी पीठ थपथपाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश का स्वाभिमान ट्रंप के सामने गिरवी रख दिया गया है।

किसानों और फसलों पर असर का मुद्दा

खरगे ने कहा कि ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर रोकने की बात कही और अमेरिका में खेती पर केवल दो-तीन प्रतिशत आबादी निर्भर है, जबकि भारत में बड़ी आबादी किसान है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील से जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के फलों सहित कई कृषि उत्पादों को उचित दाम नहीं मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि पहले भारत को अमेरिका से व्यापार में 40 बिलियन डॉलर का फायदा होता था, लेकिन अब बराबरी का समझौता नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी नहीं मानते और तानाशाही जैसा व्यवहार कर रहे हैं।

गेहूं की बालियों के साथ पहुंचे किसान

सम्मेलन में कई किसान गेहूं की बालियां लेकर पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेड्स लगाए, जिससे कार्यकर्ताओं को अंदर जाने में दिक्कत हुई और कुछ स्थानों पर धक्का-मुक्की भी हुई।

प्रदेश कांग्रेस नेताओं के बयान

  • प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यह डील भारत-अमेरिका के बीच नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच हुई है।
  • नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इस डील से सबसे ज्यादा नुकसान मध्य प्रदेश के किसानों को होगा। विशेषकर गेहूं, मक्का, सोयाबीन, सरसों और कपास किसानों को।
  • पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पर अमेरिका का दबाव है और किसानों के हित खुलेआम बेचे गए हैं।

अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं

सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ उपस्थित नहीं रहे क्योंकि वे प्रदेश से बाहर थे, हालांकि उनके पुत्र नकुल नाथ मौजूद रहे। कांतिलाल भूरिया ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने किसानों का कर्ज माफ किया था, जबकि भाजपा अपना वादा पूरा नहीं कर पाई। जयवर्धन सिंह ने कहा कि ट्रेड डील के बाद सोयाबीन के दाम गिर गए हैं। सचिन यादव ने इसे किसानों की कमर तोड़ने वाला कदम बताया। कुणाल चौधरी ने सरकार को ‘सरेंडर सरकार’ कहा। धर्मेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि इस डील से मध्य प्रदेश को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। विक्रांत भूरिया ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थकों ने कांग्रेस कार्यालय पर हमला किया और आगे सड़कों पर संघर्ष की बात कही।