विदेश डेस्क, मुस्कान सिंह।
मुजफ्फराबाद/रावलकोट : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को लेकर राजनीतिक तनाव गहरा गया है। इन सीटों की व्यवस्था और उनके उपयोग को लेकर विभिन्न राजनीतिक संगठनों तथा स्थानीय समूहों के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं, जिसके कारण कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले हैं।
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान सरकार आरक्षित सीटों का उपयोग राजनीतिक हित साधने के लिए कर रही है। संगठन का कहना है कि इन सीटों की मौजूदा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है और इसे लेकर लंबे समय से क्षेत्र में असंतोष बना हुआ है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पीओके में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और विभिन्न दल तथा संगठन अपने-अपने मुद्दों को लेकर जनता के बीच समर्थन जुटाने में लगे हैं। ऐसे में आरक्षित सीटों का मुद्दा चुनावी बहस का प्रमुख विषय बन गया है।
हाल के दिनों में क्षेत्र में हुए प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई। रिपोर्टों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों और झड़पों में जनहानि तथा कई लोगों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इससे क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
रावलकोट में एक राजनीतिक कार्यकर्ता की हत्या के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई। इस घटना के विरोध में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।
विधानसभा चुनाव से पहले पीओके में बढ़ता तनाव चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में सरकार, राजनीतिक दलों और स्थानीय संगठनों के रुख पर क्षेत्र की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी।







