नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा (CSE) की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए इस वर्ष एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
आयोग ने आधुनिक तकनीक का लाभ उठाते हुए इस बार के परीक्षा चक्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग आधारित एडवांस एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया है। इस अत्याधुनिक तकनीक की मदद से यूपीएससी ने प्रारंभिक परीक्षा के स्तर पर ही एक बड़ा नेटवर्क पकड़ते हुए कुल 569 आवेदनों को तत्काल प्रभाव से खारिज (रिजेक्ट) कर दिया है। यह पहली बार है जब देश की इतनी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा के शुरुआती चरण में ही इतनी बड़ी संख्या में विसंगतियों और धोखाधड़ी के प्रयासों को सीधे एआई स्क्रीनिंग के जरिए पकड़ा गया है।
आयोग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस एआई-संचालित सॉफ्टवेयर को विशेष रूप से उन आवेदकों की पहचान करने के लिए डिजाइन और प्रशिक्षित किया गया था जो आयोग के कड़े नियमों को दरकिनार करने की कोशिश कर रहे थे। जांच में यह सामने आया कि खारिज किए गए 569 आवेदनों में से अधिकांश ऐसे उम्मीदवारों के थे जिन्होंने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर या नाम और जन्मतिथि में मामूली फेरबदल करके एक से अधिक बार फॉर्म भरे थे। ऐसा करने के पीछे मुख्य उद्देश्य परीक्षा के लिए निर्धारित अधिकतम प्रयासों (Attempts) की सीमा का उल्लंघन करना था। इसके अलावा, कई मामलों में एआई ने फोटो और हस्ताक्षर के मिलान में गंभीर विसंगतियां पाईं, जहां एक ही चेहरे की धुंधली या संपादित (Edited) तस्वीरों का इस्तेमाल अलग-अलग पहचान पत्रों के साथ किया गया था ताकि परीक्षा केंद्रों पर डमी उम्मीदवारों (सॉल्वर गैंग) को बिठाया जा सके।
यूपीएससी की पारंपरिक स्क्रूटनी प्रक्रिया में लाखों आवेदनों की इस सूक्ष्मता से जांच करना लगभग असंभव था, क्योंकि मैन्युअल चेकिंग में नामों की स्पेलिंग या मामूली बदलावों को पकड़ना बेहद जटिल काम होता है। लेकिन इस बार एआई सिस्टम ने कुछ ही सेकंड में डेटाबेस के भीतर कई स्तरों पर क्रॉस-वेरिफिकेशन (Cross-Verification) किया। सिस्टम ने न केवल आवेदकों के बुनियादी विवरणों का मिलान किया, बल्कि उनके द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेजों के डिजिटल पैटर्न और मेटाडेटा की भी गहन जांच की। जिन आवेदनों में थोड़ी भी संदिग्ध गतिविधि या डुप्लीकेसी पाई गई, उन्हें सिस्टम ने तुरंत 'रेड फ्लैग' (Red Flag) यानी संदिग्ध श्रेणी में डाल दिया, जिसके बाद आयोग के अधिकारियों ने मैन्युअल रूप से उनकी अंतिम जांच कर उन्हें हमेशा के लिए निरस्त कर दिया।
इस बड़ी कार्रवाई के बाद यूपीएससी ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए एक आधिकारिक चेतावनी भी जारी की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी सभी परीक्षाओं के लिए इस तकनीक का दायरा और अधिक बढ़ाया जाएगा। पकड़े गए उम्मीदवारों को न सिर्फ इस परीक्षा से बाहर किया गया है, बल्कि नियमों के गंभीर उल्लंघन के मामले में उन्हें भविष्य की सभी परीक्षाओं से हमेशा के लिए प्रतिबंधित (Debar) करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर भी विचार किया जा रहा है। आयोग के इस कड़े कदम से उन लाखों ईमानदार और दिन-रात मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों में एक सकारात्मक संदेश गया है जो पूरी निष्ठा से परीक्षा की तैयारी करते हैं। इस डिजिटल सुरक्षा कवच ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक दौर में सरकारी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या शॉर्टकट अपनाना अब नामुमकिन होता जा रहा है।







