विदेश डेस्क, नीतीश कुमार |
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि उसकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के जरिए होने वाले तेल परिवहन को रोकती है, तो उस पर अब तक के मुकाबले ‘बीस गुना अधिक भयानक’ हमला किया जाएगा।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि अगर ईरान ऐसा कोई कदम उठाता है जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल का प्रवाह बाधित होता है, तो अमेरिका उससे कहीं अधिक ताकत के साथ जवाबी कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसे लक्ष्यों को भी निशाना बना सकता है जिन्हें नष्ट करना आसान है, जिससे ईरान के लिए एक राष्ट्र के रूप में फिर से खड़ा होना बेहद कठिन हो जाएगा।
ट्रंप ने इस चेतावनी को चीन और उन सभी देशों के लिए “अमेरिका की ओर से उपहार” बताया, जो होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग का व्यापक उपयोग करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कदम की सराहना की जाएगी।
बताया गया है कि 10 मार्च तक इस जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। हालांकि इसे औपचारिक रूप से बंद करने की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बढ़ते जोखिमों के कारण बीमा कंपनियों द्वारा बीमा रद्द किए जाने से जहाजों का आवागमन प्रभावी रूप से रुक गया है।
दुनिया की प्रमुख शिपिंग कंपनियां जैसे मार्सक, सीएमए सीजीएम और हैपग-लॉयड ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को रोक दिया है और उन्हें केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेजा जा रहा है। युद्ध की शुरुआत के बाद से ड्रोन और मिसाइल हमलों में कम से कम आठ नाविकों की मौत हो चुकी है और कई तेल टैंकरों को नुकसान पहुंचा है।
छह मार्च को संयुक्त अरब अमीरात के ध्वज वाली नौका ‘मुसाफा-2’ एक विस्फोट के बाद डूब गई, जिसमें चालक दल के तीन सदस्य लापता हो गए। सात मार्च को माल्टा के ध्वज वाले टैंकर ‘प्रिमा’ पर कथित रूप से ईरानी ड्रोन से हमला किया गया था।
भारत इस क्षेत्र में फंसे 36 भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित निकालने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। वहीं फ्रांस ने भी हालात सामान्य होने के बाद जहाजों को सुरक्षित एस्कॉर्ट करने के लिए एक मिशन की तैयारी की घोषणा की है।
नाकाबंदी के असर से 9 मार्च को कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, हालांकि बाद में यह घटकर लगभग 88 से 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गईं।
कुवैत और कतर ने कुछ ऊर्जा अनुबंधों पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर दिया है, क्योंकि टैंकर फारस की खाड़ी से सुरक्षित बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ‘फोर्स मेज्योर’ ऐसी स्थिति को कहा जाता है, जब किसी असाधारण परिस्थिति के कारण पक्षों को अपने दायित्वों से अस्थायी राहत मिल जाती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। विश्व की कुल तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अमेरिकी ऊर्जा प्रशासन के अनुसार, इस मार्ग से गुजरने वाले कच्चे तेल का करीब 84 से 89 प्रतिशत और एलएनजी का 83 प्रतिशत एशियाई देशों के लिए होता है। भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की ऊर्जा आपूर्ति भी काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर है।







