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अपराधियों का साथ देने वाले पुलिसकर्मी 15 दिन में होंगे बर्खास्त: DGP विनय कुमार

स्टेट डेस्क, एन. के. सिंह।

DGP का एलान, वर्दी पहनकर अपराध करने वालों के लिए पुलिस में कोई जगह नहीं। बिहार पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन' और 2025 के अपराध आंकड़ों का सनसनीखेज खुलासा।

पटना: बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने आज महकमे के भीतर और बाहर के अपराधियों को जो कड़ा संदेश दिया है, उससे पूरे राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। डीजीपी ने दो टूक शब्दों में 'ऑपरेशन क्लीन' का आगाज़ करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि खाकी की आड़ में अपराध करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए एलान किया कि वैसे पुलिस पदाधिकारी जो आपराधिक कृत्यों में संलिप्त पाए जाएंगे, उन्हें महज 15 से 20 दिनों के भीतर न केवल सस्पेंड किया जाएगा, बल्कि सेवा से बर्खास्त कर सीधे जेल भेजा जाएगा। डीजीपी ने कड़क आवाज में कहा, "ऐसे लोगों के लिए पुलिस विभाग में कोई जगह नहीं है, जो वर्दी पहनकर अपराधी जैसा आचरण करते हैं।"

बिहार में 'सुशासन' का नया दौर, अपराध के आंकड़ों ने गवाही दी

डीजीपी विनय कुमार के कुशल नेतृत्व में बिहार ने न केवल शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने का कीर्तिमान स्थापित किया, बल्कि अपराध नियंत्रण में भी बड़ी सफलता हासिल की है। चुनाव के दौरान राज्य के किसी भी बूथ पर पुनर्मतदान की नौबत नहीं आई, जो पुलिस की चाक-चौबंद व्यवस्था का प्रमाण है। वर्ष 2024 और 2025 का तुलनात्मक अध्ययन पेश करते हुए डीजीपी ने बताया कि राज्य के सभी प्रमुख अपराध श्रेणियों में भारी कमी आई है। हत्या के मामलों में 8.3%, डकैती में 26.9%, लूट में 30%, दंगों में 21% और दुष्कर्म की घटनाओं में 8% की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। विशेष रूप से, बिहार में डकैती का आंकड़ा पहली बार 200 के नीचे पहुंचा है, जो पुलिस की प्रभावी गश्त और मुस्तैदी को दर्शाता है।

हथियार सप्लाई नेटवर्क पर सर्जिकल स्ट्राइक और NIA का साथ

अपराध की जड़ यानी 'अवैध हथियार' पर चोट करते हुए पुलिस ने इस वर्ष अभूतपूर्व कार्रवाई की है। डीजीपी ने खुलासा किया कि पुलिस ने 74 मिनी गन फैक्ट्रियों को ध्वस्त किया है और रिकॉर्ड 4963 अवैध आग्नेयास्त्र बरामद किए हैं, जिसमें रेगुलर आर्म्स की संख्या काफी अधिक है। इतना ही नहीं, अपराधियों की 'लाइफलाइन' कही जाने वाली गोलियों की सप्लाई रोकने के लिए 30,000 से अधिक कारतूस जब्त किए गए। भभुआ और नालंदा में पकड़ी गई 7000 गोलियों के मामले में बिहार पुलिस की गहन जांच के आधार पर केस NIA को सौंपा गया, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर बड़े गन हाउस संचालकों और अंतरराज्यीय नेटवर्क के सरगनाओं की गिरफ्तारी संभव हो सकी। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि यदि शस्त्र हैं भी और गोलियां नहीं मिलेंगी, तो अपराधी बेअसर हो जाएंगे।

अपराधियों की आर्थिक कमर टूटी, करोड़ों की प्रॉपर्टी होगी जब्त

अपराध नियंत्रण के लिए अब अपराधियों की संपत्ति पर भी 'हंटर' चल रहा है। धारा 107 के तहत 1424 संपत्तियों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से 408 प्रस्ताव न्यायालय में जमा किए जा चुके हैं। अब तक 92 मामलों में त्वरित कार्रवाई हुई है और जिला न्यायाधीश द्वारा तीन बड़ी संपत्तियों की जब्ती का आदेश भी जारी कर दिया गया है। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर लगाम लगाने के लिए हर थाने में 'महिला हेल्प डेस्क' को प्रभावी बनाया गया है और पोक्सो एक्ट के तहत 500 से अधिक अपराधियों को सजा दिलाकर पुलिस ने अपनी संवेदनशीलता और रफ्तार का परिचय दिया है।

नक्सलवाद का अंतिम संस्कार और 'नया सवेरा'

बिहार में नक्सली हिंसा अब बीते दौर की बात हो गई है। डीजीपी ने बताया कि हाल के वर्षों में कोई बड़ी नक्सली घटना नहीं हुई है, लेकिन पुलिस ने सोए हुए नक्सलियों को भी नहीं छोड़ा। वर्ष 2025 में 134 नक्सली गिरफ्तार किए गए, जिनमें 5 खूंखार कमांडर शामिल हैं। मुंगेर के खड़कपुर हिल्स में सक्रिय नक्सली गिरोहों पर दबाव का ही नतीजा है कि जोनल और सब-जोनल कमांडरों ने एसएलआर (SLR) राइफलों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। इसके साथ ही, 'नया सवेरा' अभियान के तहत मानव तस्करी के चंगुल से 100 से अधिक बच्चों को सुरक्षित बचाकर विभिन्न राज्यों से बिहार लाया गया है।

DGP विनय कुमार के इस 'एक्शन मोड' ने यह साफ कर दिया है कि बिहार पुलिस अब अपराध और भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर चलेगी। अपराधियों के साथ-साथ अब वर्दी वाले गुनहगारों की उलटी गिनती शुरू हो गई है।