बिजनेस डेस्क, मुस्कान कुमारी।
जॉर्जिया विश्वविद्यालय | अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा कि अमेरिका की नागरिकता मिलते ही इमिग्रेंट्स को अपने मूल देश के हित नहीं, बल्कि अमेरिका के हितों को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने जॉर्जिया विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए जोर दिया कि नागरिकता का मतलब है खुद को पूरी तरह अमेरिकी मानना।
वेंस ने एक भारतीय मूल की छात्रा के सवाल का जवाब देते हुए यह बात कही। छात्रा ने एच-1बी वीजा सिस्टम में बड़े पैमाने पर फ्रॉड की शिकायत की और बताया कि उसके माता-पिता को अभी ग्रीन कार्ड नहीं मिला है। वेंस ने स्वीकार किया कि एच-1बी सिस्टम में काफी फ्रॉड हो रहा है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि पिछले सालों में जो लोग अमेरिका आए, उन्होंने देश को काफी समृद्ध किया है।
नागरिकता की जिम्मेदारी पर सख्ती
उपराष्ट्रपति ने कहा, “चाहे आपकी नौ पीढ़ियां अमेरिका में रही हों या बिल्कुल नई, नागरिक बनने के बाद आपको देश के बेहतरीन हितों के बारे में सोचना होगा। न मूल देश के बारे में, न किसी समूह के बारे में।” उन्होंने जोर देकर कहा कि सिस्टम तभी काम करता है जब हर कोई खुद को अमेरिकी मानता हो।
वेंस ने अपने निजी जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी पत्नी उषा वेंस भारतीय मूल की हैं। उनके ससुर लक्ष्मी और राधाकृष्ण चिलिकुरी 1980 के दशक में भारत से अमेरिका गए थे। “मेरे ससुर ने कभी मुझे यह नहीं कहा कि आप यह काम भारत के हित में करो। कभी नहीं,” वेंस ने कहा। उन्होंने इसे नए अमेरिकियों के लिए आदर्श बताया।
यूक्रेनी मूल के व्यक्ति का उदाहरण
वेंस ने सीनेट चुनाव के दौरान एक घटना का जिक्र किया। एक यूक्रेनी मूल के अमेरिकी ने उनसे अपनी मूल देश के हित में कुछ करने को कहा था। वेंस ने जवाब दिया, “सर, सम्मान के साथ कहूं तो आपका देश अब संयुक्त राज्य अमेरिका है, न कि वह जगह जहां से आपका परिवार आया था।” यह बयान सुनकर छात्रों में हलचल मच गई।
उन्होंने कहा कि अगर नए नागरिक इसी सोच के साथ आगे बढ़ें तो मूल अमेरिकी भी इमिग्रेंट्स का स्वागत करने को तैयार रहेंगे। “अमेरिका का मतलब है अमेरिकियों का हित पहले,” वेंस का यही संदेश था।
कार्यक्रम टर्निंग पॉइंट यूएसए द्वारा आयोजित किया गया था, जो शिक्षा संस्थानों में रूढ़िवादी राजनीति को बढ़ावा देता है। वेंस ने स्पष्ट किया कि इमिग्रेशन नीति भी इसी नजरिए से बनाई जानी चाहिए।






