नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री Gajendra Singh Shekhawat ने कहा कि अमेरिका से भारत की प्राचीन और पवित्र कांस्य प्रतिमाओं की वापसी केवल कलाकृतियों की पुनर्प्राप्ति नहीं, बल्कि देश की सभ्यतागत स्मृति, सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और उन्हें स्वदेश वापस लाने के लिए लगातार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
जनपथ स्थित National Museum में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अमेरिका के स्मिथसोनियन एशियाई कला संग्रहालय से भारत को लौटाई गई तीन ऐतिहासिक कांस्य प्रतिमाओं को सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैतिक संग्रहालय व्यवस्था और सांस्कृतिक संपत्तियों की जिम्मेदार वापसी को भी मजबूत करता है।
भारत को लौटाई गई प्रतिमाओं में चोल काल की लगभग 990 ईस्वी की भगवान शिव की नटराज प्रतिमा, 12वीं शताब्दी की सोमस्कंद प्रतिमा तथा विजयनगर काल की संत सुंदरार और परवई की कांस्य प्रतिमा शामिल हैं। ये सभी प्रतिमाएं ही मूल रूप से तमिलनाडु के प्राचीन मंदिरों से संबंधित थीं, जिन्हें बीते दशकों में अवैध रूप से देश से बाहर ले जाया गया था। सरकार के अनुसार ये मूर्तियां केवल कला का नमूना नहीं, बल्कि भारत की धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक निरंतरता और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इन प्रतिमाओं की पहचान और उनके मूल स्थानों का पता लगाने के लिए विस्तृत शोध किया। पुराने अभिलेखों, मंदिरों की ऐतिहासिक तस्वीरों और क्षेत्रीय दस्तावेजों की मदद से यह पुष्टि की गई कि शिव नटराज प्रतिमा तंजावुर जिले के श्री भाव औषदेश्वर मंदिर से संबंधित है, जिसकी तस्वीर 1957 में ली गई थी। वहीं संत सुंदरार और परवई की प्रतिमा वीरसोलपुरम गांव के शिव मंदिर से तथा सोमस्कंद प्रतिमा अलात्तूर गांव के विश्वनाथ मंदिर से जुड़ी पाई गई।
इन तथ्यों के आधार पर संस्कृति मंत्रालय, अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास और स्मिथसोनियन संस्थान के बीच समन्वित बातचीत आगे बढ़ाई गई, जिसके बाद प्रतिमाओं की वापसी संभव हो सकी। सोमस्कंद और संत सुंदरार-परवई की प्रतिमाएं 12 मई 2026 को भारत पहुंच चुकी हैं, जबकि शिव नटराज प्रतिमा को अमेरिका में आयोजित “दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और हिमालय में ज्ञान की कला” प्रदर्शनी समाप्त होने के बाद भारत भेजा जाएगा।
भारत सरकार ने सद्भावना और सांस्कृतिक सहयोग के प्रतीक के रूप में शिव नटराज प्रतिमा को 2025 से 2028 तक तीन वर्षों के लिए ऋण व्यवस्था के तहत प्रदर्शनी में रखने की सहमति दी है। सरकार का मानना है कि इससे दुनिया भर के दर्शकों को इस प्रतिमा की ऐतिहासिक यात्रा, उसके मूल स्वरूप और स्वदेश वापसी की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलेगा।
श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि वर्ष 2014 के बाद से भारत ने विभिन्न देशों से अब तक 666 प्राचीन वस्तुओं को वापस हासिल किया है। इनमें से अधिकांश वस्तुएं संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, विदेशों में भारतीय दूतावासों और प्रवर्तन एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से वापस लाई गई हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि हाल ही में भारतीय मूल की 657 कला वस्तुएं अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने भारतीय दूतावास को सौंपी हैं और उनकी जांच तथा भारत लाने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी चोरी हुई सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी और संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संस्थागत प्रयासों को आगे भी इसी तरह मजबूती से जारी रखेगा।







