Ad Image
Ad Image
अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

अमेरिकी हमलों के बाद भी ईरान की मिसाइल ताकत बरकरार: रिपोर्ट

विदेश डेस्क, श्रेयांश पराशर l

अमेरिकी हमलों के बाद भी ईरान की मिसाइल ताकत बरकरार: रिपोर्ट

वॉशिंगटन l अमेरिका और इजरायल के हालिया दावों के बीच एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान की मिसाइल क्षमता अब भी काफी हद तक सुरक्षित बनी हुई है। अमेरिकी खुफिया आंकड़ों के हवाले से जारी इस रिपोर्ट में बताया गया कि ईरान ने अपने मिसाइल नेटवर्क और भूमिगत सैन्य ढांचे का बड़ा हिस्सा बचाए रखा है, जिससे उसकी सामरिक क्षमता पर सीमित असर पड़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास अभी भी अपनी लगभग 70 प्रतिशत मिसाइल प्रक्षेपण क्षमता मौजूद है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित 33 में से 30 प्रमुख प्रक्षेपण स्थलों तक उसकी पहुंच फिर से बहाल हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा सकती है।

बताया गया कि ईरान ने अपने करीब 90 प्रतिशत भूमिगत सैन्य केंद्रों और मिसाइल प्रणालियों को फिर से सक्रिय कर लिया है। इनमें कई ऐसे ठिकाने शामिल हैं, जिन्हें हालिया हमलों के दौरान नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई थीं। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया है कि उनकी रक्षा प्रणाली पहले की तरह कार्य कर रही है और देश की सुरक्षा पूरी तरह मजबूत है।

गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान से जुड़े ठिकानों पर हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायली क्षेत्रों और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।

इस बीच सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा भी हुई थी, लेकिन उसके बाद हुई बातचीत किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो क्षेत्र में अस्थिरता और गहरा सकती है।