विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
टोक्यो, जापान ने साफ किया है कि यदि उसके द्वारा उपलब्ध कराए गए हथियारों या रक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किसी तीसरे देश के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई में किया गया, तो वह संबंधित देश को रक्षा सामग्री की आपूर्ति रोक सकता है। जापान के रक्षा मंत्री Shinjirō Koizumi ने संसद में कहा कि टोक्यो इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेगा और जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठाएगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि यदि यह साबित होता है कि किसी देश ने जापान से मिले रक्षा उपकरणों का उपयोग किसी अन्य राष्ट्र के खिलाफ हमले के लिए किया है, तो जापान उस देश से तत्काल स्थिति सुधारने की मांग करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में हथियारों के उपयोग पर रोक लगाने के साथ-साथ उनसे जुड़े रखरखाव और मरम्मत के लिए जरूरी पुर्जों की आपूर्ति भी निलंबित की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि जापानी सरकार रक्षा उपकरणों के भंडारण, सुरक्षा व्यवस्था और उनके गुम होने की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं की भी निगरानी करेगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसके द्वारा भेजे गए हथियार और तकनीक निर्धारित शर्तों के तहत ही इस्तेमाल हों।
रक्षा मंत्री के अनुसार, जिन देशों को जापान रक्षा उपकरण उपलब्ध कराएगा, उन्हें संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और उद्देश्यों के अनुरूप उनका इस्तेमाल करना होगा। इसके अलावा किसी अन्य उद्देश्य से उपयोग करने या किसी तीसरे देश को स्थानांतरित करने से पहले जापान की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
उल्लेखनीय है कि अप्रैल में जापानी सरकार ने हथियार निर्यात से जुड़े नियमों में ढील दी थी। इस फैसले के बाद घातक हथियारों समेत विभिन्न रक्षा उपकरणों के निर्यात का रास्ता खुला है। हालांकि, जापान केवल उन्हीं देशों को हथियार भेज सकेगा जिनके साथ उसका रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौता मौजूद है।
जापान ने यह भी स्पष्ट किया है कि संघर्ष प्रभावित देशों को सामान्य परिस्थितियों में हथियारों की आपूर्ति नहीं की जाएगी। हालांकि, विशेष हालात में सीमित अपवाद की अनुमति दी जा सकती है। सरकार का कहना है कि नए नियमों के बावजूद हथियारों के इस्तेमाल और उनके अंतिम उद्देश्य पर सख्त निगरानी जारी रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जापान का यह रुख उसकी बदली हुई रक्षा नीति और वैश्विक सुरक्षा मामलों में बढ़ती सक्रियता को दर्शाता है। साथ ही, टोक्यो यह संदेश भी देना चाहता है कि उसकी ओर से दिए गए हथियारों का उपयोग केवल रक्षा और सुरक्षा उद्देश्यों तक सीमित रहना चाहिए।







