Ad Image
Ad Image
अमेरिकी और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता, 60 दिन का सीजफायर लागू || अमेरिकी सेंट्रल कमान की घोषणा, ईरान की नाकेबंदी समाप्त || ईरान - अमेरिका में टकराव चरम पर, नए हमलों से सीजफायर पर लग सकता ब्रेक || जापान: तूफान जोंगमी ने मचाई तबाही, 60 हजार से अधिक घरों में बिजली गुल || जयराम रमेश ने लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार परियोजना पर पुनर्विचार की अपील || नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित रेस्टोरेंट में आग से 20 की मौत, दर्जनों घायल || ट्रंप ने कहा, खाड़ी देशों की अपील पर ईरान पर हमले बंद किए गए || अदाणी समूह को अमेरिका से क्लीनचिट, आपराधिक मामलों में राहत || राहुल गांधी ने कहा, देश में बड़ा आर्थिक संकट आने वाला, आम आदमी होगा परेशान || भारत और नार्वे के बीच कुल 9 समझौतों पर हस्ताक्षर, बेहतर सहयोग की पहल: मोदी

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

आदेश को पढ़ें, भ्रम न फैलाएं: चुनाव आयोग ने INDIA गठबंधन के आरोपों को किया खारिज

स्टेट डेस्क , श्रेयांश पराशर |

बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर उठे विवाद पर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने विपक्षी INDIA गठबंधन के आरोपों को "भ्रम" बताते हुए स्पष्ट किया कि आदेश में कोई बदलाव नहीं हुआ है और लोग बिना घबराए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें।

बिहार में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) विनोद सिंह गुंजियाल ने कहा कि आरोप लगाने वाले खुद ही भ्रमित हैं और उन्होंने आदेश को सही से नहीं पढ़ा है।

उन्होंने बताया कि आयोग द्वारा 24 जून को जो आदेश जारी किया गया था, उसी के अनुसार प्रक्रिया चल रही है। आदेश की सभी बातें सार्वजनिक विज्ञापनों में पहले से दी गई हैं। विज्ञापन में वही बातें शामिल होती हैं जो आम जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं और उन्हें सुविधा देती हैं।

गुंजियाल ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई मतदाता 26 जुलाई तक मतदाता गणना फॉर्म जमा कर देता है तो उसका नाम 1 अगस्त को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में आ जाएगा। अंतिम सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदक को 11 निर्धारित दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज देना होगा।

उन्होंने बताया कि पहले गणना फॉर्म के साथ दस्तावेज भी देना होता था, लेकिन अब दस्तावेज बाद में बीएलओ के पास जमा किए जा सकते हैं। इससे लोगों को तैयारी का समय मिलेगा और भीड़ व हड़बड़ी से बचा जा सकेगा।

चुनाव आयोग ने यह भी दोहराया कि आदेश में एक लाइन, एक शब्द या एक कॉमा तक नहीं बदला गया है। 1950 के प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत ईआरओ को मतदाता नामांकन की वैधता जांचने का पूरा अधिकार है।