नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नयी दिल्ली | विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में कथित पेपर लीक और सीबीएसई से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। इसके साथ ही गठबंधन ने देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार से जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग भी की है।
सोमवार को कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इंडिया गठबंधन की बैठक करीब ढाई घंटे तक चली। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि गठबंधन के घटक दलों के बीच विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने और समन्वय को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी दलों के बीच नियमित संवाद बनाए रखने के उद्देश्य से हर दो महीने में बैठक आयोजित करने पर सहमति बनी है। इसी क्रम में गठबंधन की अगली बैठक आठ अगस्त को हैदराबाद में आयोजित की जाएगी।
खरगे ने बताया कि बैठक में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। गठबंधन के नेताओं ने कथित तौर पर ‘वोट चोरी’ और चुनावी गड़बड़ियों के मुद्दे को उठाते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि यह पत्र जल्द ही तैयार कर भेजा जाएगा, जिसमें चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर न्यायिक हस्तक्षेप और ध्यान देने का अनुरोध किया जाएगा।
नीट परीक्षा से जुड़े विवाद पर इंडिया गठबंधन ने कड़ा रुख अपनाया। बैठक में शामिल सभी दलों ने एकमत से कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल पद छोड़ देना चाहिए। गठबंधन नेताओं का मानना है कि छात्रों और अभिभावकों के बीच पैदा हुई चिंता को दूर करने के लिए जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
बैठक में देश की आर्थिक स्थिति को भी प्रमुखता से उठाया गया। विपक्षी नेताओं ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं, सामाजिक असमानता और आम जनता से जुड़े अन्य मुद्दों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से मांग की गई कि वह सभी राजनीतिक दलों की एक सर्वदलीय बैठक बुलाए, ताकि देश के सामने मौजूद आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जा सके और समाधान तलाशा जा सके।
गठबंधन ने संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर भी रणनीति बनाई। नेताओं ने निर्णय लिया कि संसद के दौरान विपक्षी दलों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा। इसके तहत लोकसभा में विपक्ष के नेता के कार्यालय में प्रतिदिन संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि विभिन्न मुद्दों पर साझा रुख तैयार किया जा सके और विपक्ष की आवाज प्रभावी ढंग से उठाई जा सके।
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, कपिल सिब्बल, एम. के. प्रेमचंद्रन, वाम दलों के प्रतिनिधियों सहित गठबंधन के कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। वहीं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।







