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इंदौर में दूषित पानी का संकट: 29 मौतें, HC ने गठित किया जांच आयोग

स्टेट डेस्क, प्रीति पायल |

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 के अंत से दूषित पेयजल का संकट चला आ रहा है, जो जनवरी 2026 में चरम पर पहुंच गया। नर्मदा नदी से आने वाली पेयजल पाइपलाइन में लीकेज होने से सीवेज पानी इसमें घुल गया, जिसके कारण ई. कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया फैले और गैस्ट्रोएंटेराइटिस (उल्टी-दस्त) की महामारी फैल गई। दिसंबर के आखिर से जनवरी तक सैकड़ों लोग इससे प्रभावित हुए।

स्थानीय लोगों, परिवारों और कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक दूषित पानी से 29 मौतें हो चुकी हैं। मसलन, 28 जनवरी 2026 को 62 वर्षीय एक बुजुर्ग की मौत के बाद ग्रामीणों ने इसे 29वीं मौत बताया। हालांकि, राज्य सरकार की 'डेथ ऑडिट' रिपोर्ट में कुल 23 मौतों में से केवल 16 को दूषित पानी से संभावित जुड़ा पाया गया। विभिन्न रिपोर्टों में मौतों की संख्या 23 से 30 के बीच बताई जा रही है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि सिर्फ 16 की है। ज्यादातर मौतें बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर स्वास्थ्य वालों में हुईं।

मामले की गंभीरता देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 27 जनवरी 2026 को एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग का गठन किया। यह एक सदस्यीय आयोग पूर्व हाईकोर्ट जज जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में कार्यरत है।

  • दूषित पानी का स्रोत (पाइपलाइन लीकेज, सीवेज मिश्रण आदि)
  • मौतों की वास्तविक संख्या और बीमारी की प्रकृति।
  • चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, तात्कालिक व दीर्घकालिक उपाय।
  • अधिकारियों की जिम्मेदारी और पीड़ितों को मुआवजा।

आयोग को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां मिली हैं, जैसे गवाह बुलाना, दस्तावेज मंगाना और स्पॉट जांच। जांच शुरू होने के 4 सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट सौंपी जानी है। कोर्ट ने राज्य सरकार, इंदौर नगर निगम, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पूर्ण सहयोग का निर्देश दिया।

प्रभावित इलाकों में टैंकरों से शुद्ध पानी की आपूर्ति, मेडिकल कैंप और दैनिक पानी परीक्षण जारी हैं। महू जैसे अन्य क्षेत्रों से भी समान शिकायतें मिली हैं। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार, जिसमें स्वच्छ पानी शामिल) का उल्लंघन करार दिया और स्थिति को 'अलार्मिंग' बताया। विपक्ष व कुछ भाजपा नेता (जैसे उमा भारती) ने सरकार की आलोचना की, इसे 'कलंक' कहा। यह स्वच्छ भारत अभियान के 'सबसे स्वच्छ शहर' इंदौर की छवि पर सवाल खड़ा कर रहा है। आयोग की रिपोर्ट से और स्पष्टता आएगी।