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इंसान की पहचान वाणी, विचार व कार्यों से: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: आत्मीय रिश्तों का कभी अलगाव नहीं होता है,जहाँ विश्वास होता है वहाँ कोई परीक्षण नहीं होता है,परोपकारी प्रवृति का कभी अंत नहीं होता है,जी ले मन भर करके बीते हुए समय का कोई संग्रह नहीं होता है।

उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।सकारात्मक सोच ही सफल जीवन का आधार है।इंसान के परिचय की शुरुआत भले ही चेहरे से होती होगी लेकिन उसकी सम्पूर्ण पहचान तो उसकी वाणी,विचार और कार्यो से होती है। मुस्कान हृदय की मधुरता को दर्शाती है, शांति बुद्धि की परिपक्वता को दर्शाती है और मनुष्य में इन दोनों का होना एक मनुष्य की संपूर्णता को दर्शाता है। वह पथ क्या,पथिक कुशलता क्या,जिस पथ पर बिखरे शूल न हों। नाविक की धैर्य परीक्षा क्या,जब धाराएं प्रतिकूल न हो। जैसे फल और फूल किसी की प्रेरणा के बिना ही अपने समय पर वृक्षों में लग जाते हैं,उसी प्रकार किए हुए अच्छे और बुरे कर्म भी अपने आप जीवन में स्वतः फल देने आते रहते हैं।

छोटी सी जिंदगी में किस-किस को खुश करें साहब,जलाते हैं अगर चिराग तो अंधेरे बुरा मान जाते हैं। दुनिया में बेकार नाम की कोई चीज नहीं है, जो वृक्ष फल,फूल,पत्ती,छाया तक नहीं दे सकता वह उपयोगी लकड़ी प्रदान कर देता है। समझनी है जिंदगी तो पीछे देखें और जीनी है जिंदगी तो आगे देखें क्योंकि माने तो सबकी मौज है वरना समस्या तो हर रोज है। खुद से बहस करेगे तो सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे अगर दुसरे से करेंगे तो और नए सवाल खड़े हो जायेंगे। जैसे समुद्र की लहरें,आती और जाती रहती हैं, वैसे ही जीवन की परिस्थितियां भी हैं। हमें बस एक कुशल नाविक की तरह अपनी जीवन की नाव को संतुलित रखना सीखना होता है। जब मन कमजोर होता है परिस्थितियां समस्या बन जाती है, जब मन स्थिर होता है परिस्थितियां चुनौती बन जाती है, जब मन मजबूत होता है परिस्थितियां अवसर बन जाती।मन की स्थिरता ही जीवन जीने का मूल मंत्र है।