विदेश डेस्क, ऋषि राज |
मास्को: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रूस ने बड़ा कूटनीतिक संकेत देते हुए कहा है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव को कम करने के लिए मध्यस्थता करने को तैयार है। रूस का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य और राजनीतिक तनाव को केवल संवाद और शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है।
वियना स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठनों में रूस के स्थायी प्रतिनिधि मिखाइल उल्यानोव ने यह बयान देते हुए कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो रूस ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कूटनीति और संवाद ही सबसे बेहतर रास्ता है, क्योंकि सैन्य टकराव से पूरे क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
उल्यानोव ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से वैश्विक शांति और सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए सभी पक्षों को संयम बरतने और स्थिति को और अधिक गंभीर होने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस लंबे समय से क्षेत्रीय स्थिरता और संवाद आधारित समाधान का समर्थक रहा है।
पिछले कुछ दिनों से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और कई जगहों पर हमलों और जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते तनाव कम करने की पहल नहीं की गई तो यह संघर्ष व्यापक रूप ले सकता है।
रूस का यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब कई देश मध्य पूर्व में बढ़ते संकट को लेकर चिंतित हैं। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और देशों ने भी दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की है।
रूसी अधिकारियों का कहना है कि यदि दोनों देश तैयार हों तो रूस बातचीत के लिए मंच उपलब्ध कराने और समाधान की दिशा में सहयोग देने को तैयार है। उनका मानना है कि बातचीत के जरिए ही गलतफहमियों को दूर किया जा सकता है और क्षेत्र में स्थिरता बहाल की जा सकती है।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि आने वाले दिनों में ईरान और अमेरिका इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इस बढ़ते तनाव को कम किया जा सकेगा।







