विदेशडेस्क डेस्क, श्रेया पाण्डेय
तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और तनाव के बीच ईरान ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा है कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को भारत और चार अन्य मित्र देशों—रूस, चीन, इराक और पाकिस्तान—के जहाजों के लिए खोल दिया गया है।
28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों और उसके बाद उपजे युद्ध जैसे हालातों के कारण दुनिया के इस सबसे व्यस्त तेल मार्ग पर आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। ईरान ने सुरक्षा कारणों और 'शत्रु देशों' पर दबाव बनाने के लिए इस जलमार्ग पर कड़ाई से नियंत्रण लागू कर दिया था। हालांकि, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लगातार ईरानी नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। इसी कूटनीतिक सक्रियता का परिणाम है कि ईरान ने भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल किया है जिनके जहाजों को सुरक्षित रास्ता (Safe Passage) दिया जाएगा।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 40% कच्चा तेल, 50% एलएनजी (LNG) और 90% एलपीजी (LPG) इसी संकरे जलमार्ग के जरिए आयात करता है। हॉर्मुज के बंद होने से भारत में रसोई गैस की भारी किल्लत शुरू हो गई थी और दर्जनों भारतीय जहाज वहां फंसे हुए थे। ताजा फैसले के बाद, 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' जैसे भारतीय एलपीजी जहाजों ने सफलतापूर्वक इस क्षेत्र को पार किया है। विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया कि हालांकि अभी कोई औपचारिक 'ब्लैंकेट एग्रीमेंट' नहीं है, लेकिन हर जहाज की आवाजाही पर ईरान के साथ समन्वय किया जा रहा है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बहाल हो सके।
ईरानी विदेश मंत्री अरागची ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पूरी तरह बंद नहीं है, यह केवल हमारे दुश्मनों के लिए बंद है।" ईरान ने उन जहाजों पर प्रतिबंध जारी रखा है जो अमेरिका या इजरायल से जुड़े हैं। तेहरान का यह कदम स्पष्ट रूप से विश्व शक्तियों के बीच एक विभाजन रेखा खींचता है। रूस और चीन जैसे सहयोगियों के साथ भारत को इस सूची में रखना भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) की जीत मानी जा रही है। ईरान ने साफ किया है कि जो देश उनकी सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे और पूर्व समन्वय करेंगे, उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी।
जहां एक तरफ संयुक्त राष्ट्र (UN) इस जलमार्ग को सभी के लिए खोलने की अपील कर रहा है, वहीं ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता और रक्षा के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। भारत के लिए यह राहत तो है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। फिलहाल, भारत सरकार अपने शेष 22 जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में है।







