नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय।
वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) एक बार फिर विनाशकारी युद्ध के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है। पिछले महीने दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित एक नाजुक युद्धविराम समझौते के टूटने के बाद से स्थितियां तेजी से अनियंत्रित हो रही हैं। वैश्विक मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित हो रही खबरों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों और महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचों (जैसे पावर प्लांट्स और पुलों) पर बड़े पैमाने पर नए हवाई हमले करने की खुली चेतावनी दिए जाने के बाद, ईरान ने भी बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान के विशिष्ट सैन्य संगठन 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने अमेरिका को सख्त लहजे में आगाह करते हुए कहा है कि वे 'इंतजार करें और देखें', क्योंकि ईरान किसी भी अमेरिकी दुस्साहस का जवाब एक 'अकल्पनीय और विनाशकारी हमले' से देने के लिए तैयार है। इसके साथ ही, IRGC ने यह भी दावा किया है कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तैनात अमेरिकी नौसैनिक इकाइयां और युद्धपोत उनके सीधे रडार और चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी में हैं।
यह ताजा गतिरोध तब और गहरा गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में साफ तौर पर कहा कि यदि ईरान शांति वार्ता की मेज पर तुरंत वापस नहीं आता है, तो उसके लिए आगामी दिनों में स्थितियां बहुत ज्यादा खराब होने वाली हैं। ट्रंप ने सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि अमेरिकी वायुसेना ईरान के बिजली संयंत्रों और प्रमुख पुलों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर देगी। इसके साथ ही, ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान हमेशा से परमाणु हथियार बनाना चाहता था और पूर्व में अमेरिकी बी-2 (B-2) बमवर्षकों द्वारा किए गए हमले ('ऑपरेशन मिडनाइट हैमर') के बाद भी यदि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को फिर से शुरू करता है, तो अमेरिका दोबारा बमबारी करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर यह भी साझा किया कि अमेरिका की लगभग 1000 मिसाइलें 'लॉक्ड एंड लोडेड' (दागे जाने के लिए बिल्कुल तैयार) हैं और यदि ईरान ने अमेरिकी हितों या उनके जीवन को नुकसान पहुंचाने की कोई भी कोशिश की, तो अमेरिका ईरान का नामोनिशान मिटा देगा। ट्रंप प्रशासन ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी को फिर से लागू कर दिया है।
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय और उसके शीर्ष कमांडरों ने अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी को पूरी तरह से अवैध और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करार दिया है। ईरान के शीर्ष वार्ताकारों का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी आक्रामकता और प्रतिबंधों को खत्म नहीं करता, तब तक किसी भी समझौते का कोई औचित्य नहीं है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके तेल निर्यात और ऊर्जा नेटवर्क को निशाना बनाया गया, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य के वैश्विक तेल मार्ग को हमेशा के लिए बंद कर देगा, जिससे पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजारों में कोहराम मच सकता है। अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए, IRGC ने हाल के दिनों में बहरीन और कुवैत जैसे देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संपत्तियों पर भीषण मिसाइल और ड्रोन हमले भी किए हैं। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों परमाणु और सैन्य शक्तियों के बीच चल रहा यह वाकयुद्ध और सैन्य टकराव कभी भी एक पूर्ण पैमाने पर विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे न केवल खाड़ी देश बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित होगी।







