विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
वॉशिंगटन। जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इस हमले के बाद अमेरिका ने सख्त रुख अपनाते हुए ईरान को कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान की इस कार्रवाई का करारा जवाब दिया जाएगा। वहीं जवाबी कार्रवाई के तहत अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं।
मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगा और उसकी हर आक्रामक गतिविधि का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने अचानक मिसाइल हमला किया था, लेकिन अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही मार गिराया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने वह फुटेज भी देखी है, जिसमें अमेरिकी सैनिक वास्तविक समय में मिसाइलों के निर्देशांक की निगरानी करते हुए उन्हें इंटरसेप्ट कर रहे थे। उन्होंने भरोसा जताया कि अमेरिकी सेना किसी भी खतरे से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जॉर्डन के मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस पर हुए मिसाइल हमले की जिम्मेदारी ली है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, आईआरजीसी की एयरोस्पेस फोर्स ने अमेरिकी एयर बेस और सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। संगठन ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की कथित आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की गई है। आईआरजीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक ईरान के खिलाफ खतरे और अमेरिकी सैन्य गतिविधियां जारी रहेंगी, तब तक उसका प्रतिरोध भी जारी रहेगा।
जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसने ईरान की पांच मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, जिससे किसी बड़े नुकसान को टाल दिया गया। अधिकारियों के अनुसार इस हमले में तत्काल किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली। इसके बाद अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर संयुक्त हवाई कार्रवाई की। दोनों देशों का कहना है कि यह अभियान इराक सरकार के साथ समन्वय बनाकर चलाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के चार सैन्य सलाहकारों सहित 20 से अधिक लड़ाके मारे गए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की कि अमेरिकी और सऊदी लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में ईरान समर्थित ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। सेना के अनुसार इन ठिकानों का इस्तेमाल हथियारों के भंडारण, रसद गतिविधियों और हमलों की योजना बनाने के लिए किया जा रहा था। सेंटकॉम ने बताया कि यह कार्रवाई हाल के दिनों में आईआरजीसी समर्थित समूहों द्वारा किए गए ड्रोन हमलों तथा अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की कोशिशों के जवाब में की गई। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि जॉर्डन स्थित उसके सैन्य अड्डों पर ईरान का हमला पूरी तरह विफल रहा और भविष्य में भी किसी भी हमले का सख्ती से जवाब दिया जाएगा।
उधर ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय ने इसे इराक की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमला बताते हुए संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन करार दिया। ईरान ने आरोप लगाया कि हमलों में सरकारी परिसरों के साथ-साथ अरबईन यात्रियों के जुलूसों और ठहराव स्थलों को भी निशाना बनाया गया। वहीं ईरान समर्थित संगठन 'इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक' ने चेतावनी दी है कि वह इस कार्रवाई का जवाब देगा और भविष्य में सऊदी अरब में अमेरिकी हितों तथा उससे जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।







