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उच्चेश्वर नाथ धाम का होगा कायाकल्प, इको-टूरिज्म विकास को 26.31 करोड़ की स्वीकृति

स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना ।

- कल होगा शिलान्यास 

पटना, खड़गपुर वन प्रक्षेत्र अंतर्गत टेटिया बम्बर प्रखंड के देवघरा स्थित श्री उच्चेश्वर नाथ धाम में इको-टूरिज्म विकास कार्य के लिए कुल 26,31,45,418 रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
       
उच्चेश्वर नाथ धाम शिव सर्किट के प्रमुख मंदिरों में शामिल है। इस सर्किट में अजगेवीनाथ धाम, ढ़ोल पहाड़ी, रंगनाथ धाम, उच्चेश्वर नाथ धाम तथा बाबा बैद्यनाथ धाम शामिल हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर महाभारत काल से स्थापित माना जाता है और इसका संबंध अर्जुन के गांडीव तथा भीम के विवाह जैसी पौराणिक घटनाओं से जोड़ा जाता है।
      योजना के तहत विवाह मंडप, हवन कुंड, पार्किंग, यात्री शेड, मुख्य मंदिर तक जाने वाले मार्ग का विकास, सेल्फी पॉइंट, फूड काउंटर, मेला ग्राउंड में मंच और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही थीम आधारित प्रवेश द्वार, त्रिशूल, नंदी, स्टोन बेंच और पत्थर की मूर्तियां भी आकर्षण का केंद्र होंगी।
     
देवघरा गांव में स्थित यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है, जिसके चारों ओर घने जंगल और सुंदर पहाड़ हैं। यहां से आसपास के क्षेत्रों का दृश्य दिखाई देता है और वातावरण शांत एवं प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। इस कारण यह स्थल श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र है।
      
धार्मिक दृष्टि से यह धाम क्षेत्र का एक प्रमुख ‘जाग्रत शिव मंदिर’ माना जाता है, जहां श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूर्ण होती है। महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की दूरदर्शी पहल के अंतर्गत इस धाम को इको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित  किया जा रहा है। 
      
विकास योजना के तहत यहां रोपवे निर्माण का भी प्रस्ताव है, जिससे वृद्धों, बच्चों एवं दिव्यांगों को पहाड़ी पर चढ़ाई को सुगम और सुरक्षित बनाया जा सकेगा। साथ ही पेयजल व्यवस्था और ट्रैकिंग मार्ग के विकास पर भी कार्य किया जाएगा। इस पहल से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।