लोकल डेस्क, एन के सिंह।
जालसाजों ने पुलिस थानों के भीतर ही बांटे फर्जी आईडी कार्ड, ट्रेनिंग के नाम पर मुजफ्फरपुर में रचा गया पूरा स्वांग।
पूर्वी चंपारण: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने न केवल पुलिस प्रशासन की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सरकारी सिस्टम में सेंधमारी की एक खौफनाक तस्वीर भी पेश की है। चंपारण की धरती पर 'पुलिस मित्र' बहाली के नाम पर बेरोजगार युवाओं के सपनों की सरेआम नीलामी की गई। यह महज एक मामूली धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित 'महाठगी' है, जिसे अंजाम देने के लिए जालसाजों ने किसी दफ्तर या होटल के बजाय सीधे पुलिस थानों को ही अपना सुरक्षित ठिकाना बना लिया। इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश तब हुआ जब पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर चिरैया से 'पुलिस मित्र' के स्वयंभू प्रदेश अध्यक्ष को उसकी आलीशान बोर्ड लगी गाड़ी के साथ दबोचा गया।
इस महाठगी की पटकथा इतनी शातिर तरीके से लिखी गई थी कि आम युवा तो क्या, पुलिस महकमे के रीढ़ माने जाने वाले चौकीदार और दफादार भी झांसे में आ गए। जालसाजों ने युवाओं को मुजफ्फरपुर में ले जाकर बाकायदा ट्रेनिंग का ढोंग रचा, ताकि उन्हें पूरी प्रक्रिया सरकारी और वैध लगे। इसके बाद जो हुआ वह और भी हैरान करने वाला है; ट्रेनिंग के बाद इन युवाओं को विभिन्न थानों में बुलाकर आईडी कार्ड बांटे गए और स्टेशन डायरी यानी सनहा में उनकी बाकायदा एंट्री कराई गई। 20 हजार रुपये प्रति माह की सरकारी नौकरी और पुलिस की वर्दी का रसूख पाने की चाहत में बेरोजगारों ने अपनी गाढ़ी कमाई के 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक इन ठगों के हवाले कर दिए।
पुलिस कप्तान स्वर्ण प्रभात ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उन्होंने एक प्रशिक्षु IPS अधिकारी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसमें साइबर विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। जांच की आंच अब उन थाना प्रभारियों तक पहुँचने वाली है जिनके संरक्षण में या जिनकी नाक के नीचे थानों के भीतर आईडी कार्ड बांटने जैसा दुस्साहस किया गया। अरेराज, फेनहारा, ढाका, चिरैया और घोड़ासहन जैसे थानों की भूमिका अब गहन जांच के दायरे में है। एसपी ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि यदि किसी भी थानेदार की इस 'करोड़लोक' के खेल में संलिप्तता मिली, तो उन्हें न केवल जेल भेजा जाएगा बल्कि सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
फिलहाल SIT की छापेमारी मुजफ्फरपुर से लेकर मोतिहारी के सुदूर इलाकों तक जारी है। आधी रात को हुई छापेमारी में कई अहम डिजिटल साक्ष्य और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। अब तक 41 ऐसे युवाओं की पहचान हो चुकी है जो इस मायाजाल के शिकार बने हैं, लेकिन अंदेशा जताया जा रहा है कि यह आंकड़ा सैकड़ों में हो सकता है। सोशल मीडिया पर चल रहे संदिग्ध चैनलों और डिजिटल पेमेंट के रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है ताकि इस सिंडिकेट की जड़ों तक पहुँचा जा सके। चंपारण पुलिस की यह कार्रवाई उन सफेदपोश ठगों के लिए एक बड़ा अल्टीमेटम है जो खाकी की आड़ में आम जनता के विश्वास का कत्ल कर रहे थे।







