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कर्तव्यों को ऐसे निभाए कि स्वयं की नजरों में अपना कद ऊंचा हो: बिमल सर्राफ

लोकल डेस्क, ऋषि राज।

रक्सौल: सुख दुःख एक समुच्चय की तरह से हैं।जीवन में समस्त संभावनाएं निहित हैं।हम सब अच्छे जीवन की सफलता की और श्रेयस की कामना करते हैं,लेकिन जीवन तो उतार और चढ़ाव का खेल है।उक्त विचार लायंस क्लब ऑफ रक्सौल के अध्यक्ष सह मीडिया प्रभारी एवं भारत विकास परिषद् , रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी सह सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने प्रेस से साझा किया।

हम सभी कभी-न-कभी अवसाद और तनाव से आहत होते हैं,तो कभी दुःखों एवं पीड़ाओं का एहसास जीवन में निरंतर बना ही रहता है।जिंदगी में हमेशा सब कुछ अच्छा और सही ही हो ऐसा कैसे संभव है ? किसी की जिंदगी में ऐसा नहीं होता।"कोशिशें करने से सब सदा सही हो यह जरूरी नहीं,पर ऐसा करने से हमारी गलतियाँ जरूर कम हो जाती हैं।" हर सुबह हम इसी सोच और संकल्प के साथ दिन शुरू करते हैं कि हमें अपने व्यक्तित्व निर्माण में कुछ नया करना है,नया बनना है,पर हम सोचें कि क्या हमने निर्माण की प्रक्रिया में नए पदचिन्ह स्थापित करने के प्रयास किए ? क्या ऐसा कुछ कर सके कि स्वयं की नजर में हमारे कर्तव्य का कद ऊँचा उठ सके ? कहीं ऐसा तो नहीं कि हम भी आम आदमी की तरह यही कहें कि क्या करें 'समय ने साथ नहीं दिया।

'यदि ऐसा हुआ तो हम फिर एक बार दर्पण में स्वयं का चेहरा देखकर उसे न पहचानने की भूल कर बैठेंगे। आज इस सच्चाई को कौन इंकार करेगा कि ग़रीब की गरिमा,सादगी का सौंदर्य,संघर्ष का हर्ष,समता का स्वाद और आस्था का आनंद,ये सब आचरण से पतझड़ के पत्तों की तरह झर गए हैं।जरूरी नहीं कि किसी अन्य के अपने बनाए अपने बनाए नियम हम पर भी सही साबित हों।परेशानी तब आती है,जब हम बिना सोचे-समझे का अनुसरण करने लगते हैं।