नेशनल डेस्क, श्रेया पाण्डेय |
भोपाल/इंदौर: मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर अपनी विवादित टिप्पणी को लेकर एक बार फिर माफी मांगी है। यह माफीनामा ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर अहम सुनवाई होनी है और कोर्ट ने राज्य सरकार से मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने (अभियोजन) की मंजूरी पर जवाब मांगा है। मंत्री शाह ने शनिवार को एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उनके शब्द उनकी भावनाओं के अनुरूप नहीं थे और वे "देशभक्ति के उत्साह, उत्तेजना और आवेश" में निकल गए थे।
यह विवाद पिछले साल मई (2025) में शुरू हुआ था, जब इंदौर जिले के रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान विजय शाह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' (पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना की कार्रवाई) का जिक्र करते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। उन्होंने कर्नल सोफिया को आतंकियों के "समुदाय की बहन" बताते हुए विवादित तुलना की थी। इस बयान के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इसे "गटर की भाषा" करार देते हुए डीजीपी को मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे।
इस मामले में विजय शाह अब तक चार बार माफी मांग चुके हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में उनकी माफी को "घड़ियाली आंसू" और "राष्ट्रीय शर्मिंदगी" बताते हुए खारिज कर दिया था। कोर्ट की सख्ती के बाद, मंत्री ने अब अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा, "मेरा उद्देश्य किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या किसी समाज का अपमान करना नहीं था। मेरी एक छोटी सी गलती से इतना बड़ा विवाद खड़ा होना मेरे लिए पीड़ादायक है। मैं भविष्य में अपनी वाणी पर संयम रखने का संकल्प लेता हूँ।"
राजनीतिक और कानूनी दबाव
9 फरवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सरकार को अपना पक्ष रखना है। विपक्ष (कांग्रेस) लगातार विजय शाह के इस्तीफे और उनके निष्कासन की मांग कर रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह ताजा माफीनामा कानूनी कार्यवाही से बचने और सरकार पर बढ़ते दबाव को कम करने की एक कोशिश है। फिलहाल, यह देखना होगा कि क्या शीर्ष अदालत इस बार उनकी माफी को स्वीकार करती है या मंत्री को कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा।







