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कांग्रेस को झटका? अजय निषाद BJP के साथ फिर से जुड़ सकते हैं

स्टेट डेस्क, प्रीति पायल |

मुजफ्फरपुर के पूर्व सांसद अजय निषाद की राजनीतिक यात्रा एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गई है। दो बार BJP के टिकट पर जीतने वाले इस निषाद नेता की कहानी राजनीतिक उतार-चढ़ाव का जीवंत उदाहरण है। अजय निषाद ने 2014 और 2019 में भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट पर जीत हासिल की थी। निषाद समुदाय से आने वाले इस नेता को पार्टी ने OBC वोट बैंक को मजबूत बनाने की रणनीति के तहत अवसर दिया था।

लोकसभा चुनाव 2024 में स्थिति पूरी तरह बदल गई जब BJP ने अजय निषाद के बजाय राजभूषण चौधरी को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया। इस निर्णय से आहत होकर उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और धोखे का आरोप लगाते हुए कहा कि टिकट वापस लेने से पहले उनसे कोई चर्चा नहीं की गई।

2 अप्रैल 2024 को दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस ने उन्हें मुजफ्फरपुर से ही मौका दिया, लेकिन वे राजभूषण चौधरी से पराजित हुए।

8 अक्टूबर 2025 की ताजा खबरों के अनुसार, अजय निषाद को BJP ने पटना में बैठक के लिए आमंत्रित किया है। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि वे JDU और BJP के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। पार्टी उन्हें मुजफ्फरपुर या कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाने पर विचार कर रही है।

निषाद वोट बैंक की महत्ता: BJP बिहार में निषाद समुदाय के मतों को सुदृढ़ करना चाहती है। अजय जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व की वापसी से इस लक्ष्य में सहायता मिल सकती है।

कांग्रेस में अजय निषाद को अपेक्षित महत्व नहीं मिला। बिहार कांग्रेस की कमजोर स्थिति और RJD के साथ गठबंधन में उनकी आवाज दबी रही।

नवंबर 2025 के बिहार चुनावों में BJP-NDA मजबूत स्थिति में है, जबकि महागठबंधन संघर्ष कर रहा है।

X पर #AjayNishad और #BiharElection2025 ट्रेंड कर रहा है। पत्रकार मनोज मुकुल ने सूत्रों के हवाले से संभावित उम्मीदवारी की जानकारी दी है। दैनिक जागरण और ETV भारत ने भी इस पर ब्रेकिंग न्यूज चलाई है।

अगर अजय निषाद BJP में वापसी करते हैं, तो निषाद समुदाय का झुकाव पुनः BJP की ओर हो सकता है। मुजफ्फरपुर में पार्टी के वोट शेयर में वृद्धि संभव है। वहीं कांग्रेस को यह बड़ा झटका होगा, जो पहले से ही बिहार में संकट का सामना कर रही है।

यह खबर फिलहाल अटकलों के दायरे में है, लेकिन बिहार चुनाव से पहले तेजी से विकसित हो रही परिस्थितियों का हिस्सा है। आधिकारिक घोषणा का इंतजार है जो NDA के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।