नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।
नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजने की मांग की है।
सुमन ने कहा कि कांशीराम ने सरकारी नौकरी छोड़कर दलितों और पिछड़ों के हक के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने इस मांग को संसद में उठाते हुए बहुसंख्यक समाज के उत्थान का मुद्दा जोरदार तरीके से रखा।
कांशीराम का त्याग क्यों याद दिलाया सुमन ने?
सुमन ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि कांशीराम ने न केवल दलितों बल्कि पूरे पिछड़े वर्ग को राजनीतिक जागरूकता और अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने सरकारी नौकरी की सुरक्षा त्यागकर बहुजन समाज की सेवा को चुना, जो आज भी लाखों लोगों को प्रेरणा देता है। सांसद ने जोर देकर कहा कि ऐसे महान नेता को भारत रत्न जैसे सम्मान का हकदार माना जाना चाहिए।
अखिलेश यादव का समर्थन भी याद किया
रामजी लाल सुमन ने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कई बार सार्वजनिक मंचों से कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग कर चुके हैं। सुमन का बयान ऐसे समय में आया है जब बहुजन समाज के उत्थान को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है। उन्होंने कहा कि यह मांग केवल एक नेता की नहीं, बल्कि पूरे बहुसंख्यक समाज की भावना को प्रतिबिंबित करती है।
बहुजन आंदोलन की विरासत
कांशीराम ने 1984 में बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की थी। उनका उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों को एकजुट कर मजबूत राजनीतिक शक्ति बनाना था। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाते हुए वंचित वर्गों को आत्मसम्मान और भागीदारी का रास्ता दिखाया। सुमन ने इन योगदानों को रेखांकित करते हुए कहा कि कांशीराम का जीवन सामाजिक न्याय का प्रतीक है।
मांग को और मजबूती देते हुए सुमन ने सरकार से अपील की कि कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न देकर उनके संघर्ष को सम्मान दिया जाए। यह कदम न सिर्फ एक व्यक्ति को बल्कि पूरे बहुजन आंदोलन को श्रद्धांजलि होगी।







