लोकल डेस्क, एन के सिंह।
जिलाधिकारी ने दिए कड़े निर्देश। सचिव DLSA नितिन त्रिपाठी ने कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए हर कार्यस्थल पर 'आंतरिक शिकायत समिति' के अनिवार्य गठन पर जोर दिया।
पूर्वी चंपारण: महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार के आदेशानुसार आज 18 फरवरी, 2026 को राजेंद्र सभागार में एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 'कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013' (POSH Act) विषय पर आधारित थी। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकारी और निजी कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना और अधिकारियों को इस कानून के कड़े प्रावधानों से अवगत कराना था।
कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल, सचिव DLSA नितिन त्रिपाठी, नगर आयुक्त आशीष कुमार, जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी शैलेन्द्र भारती, उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार और अन्य अधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। जिला परियोजना प्रबंधक ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि कार्यस्थल पर सुरक्षा केवल कानूनी जरूरत नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।
संबोधन के दौरान जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने स्पष्ट किया कि सभी सरकारी और निजी संस्थानों की यह जवाबदेही है कि वे महिलाओं को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराएं। उन्होंने अधिकारियों को इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू करने का निर्देश दिया। वहीं, सचिव DLSA नितिन त्रिपाठी ने कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए हर कार्यस्थल पर 'आंतरिक शिकायत समिति' के अनिवार्य गठन पर जोर दिया। राज्य स्तरीय प्रशिक्षक गुंजन कुमारी ने अधिनियम की बारीकियों, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया और निवारण के कदमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और प्रतिभागियों के सवालों के जवाब भी दिए।
इस कार्यशाला में जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, और महिला एवं बाल विकास निगम के कर्मियों ने हिस्सा लिया। सभी प्रतिभागियों को अधिनियम से संबंधित गाइडलाइन, पंपलेट और अन्य अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई। विशेषज्ञों ने बताया कि यह कानून 2013 से पूरे देश में प्रभावी है, जो विशाखा दिशानिर्देशों का स्थान लेते हुए महिलाओं को कार्यस्थल पर सशक्त सुरक्षा प्रदान करता है।







