नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी |
नयी दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में आई नरमी के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को राहत देते हुए 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में बुधवार से कटौती कर दी है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं, जबकि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 2,930 रुपये हो गई है। इससे पहले जून महीने में इसकी कीमत 3,113.50 रुपये थी। इस प्रकार दिल्ली में प्रति सिलेंडर 183.50 रुपये की कमी की गई है, जिससे होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
तेल विपणन कंपनियों के अनुसार, कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में की गई कटौती सभी शहरों में समान नहीं है। विभिन्न राज्यों और शहरों में स्थानीय करों, परिवहन लागत तथा अन्य क्षेत्रीय कारकों के आधार पर कीमतों में कमी की राशि अलग-अलग तय की गई है।
दूसरी ओर, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। दिल्ली में यह सिलेंडर पहले की तरह 942 रुपये में ही उपलब्ध रहेगा। यानी इस बार केवल कॉमर्शियल श्रेणी के उपभोक्ताओं को ही मूल्य कटौती का लाभ मिला है।
गौरतलब है कि एक जून को तेल विपणन कंपनियों ने कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि की थी। उस समय दिल्ली में प्रति सिलेंडर 42 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद सात जून को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी 29 रुपये का इजाफा किया गया था, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा था।
पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण एलपीजी की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी देखी गई। इसी वजह से तेल विपणन कंपनियों ने बीते तीन महीनों के दौरान एलपीजी के दाम में लगातार बढ़ोतरी की थी। हालांकि आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ कम रखने के उद्देश्य से घरेलू सिलेंडर की कीमतों में सीमित वृद्धि की गई थी।
अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में आई गिरावट का असर देश के कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को मिलने लगा है। इसी के मद्देनज़र तेल विपणन कंपनियों ने कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम कम किए हैं। माना जा रहा है कि इससे होटल, ढाबा, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की परिचालन लागत में कुछ कमी आएगी, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल कीमतों में किसी राहत के लिए इंतजार करना होगा।







